जनसुनवाई में सवालों की बौछार, जवाबों का टोटा! आमाडांड OCM पर ग्रामीणों ने उठाए तीखे सवाल

जनसुनवाई में सवालों की बौछार, जवाबों का टोटा! आमाडांड OCM पर ग्रामीणों ने उठाए तीखे सवाल

अनूपपुर। आमाडांड OCM की पर्यावरणीय जनसुनवाई में उस समय माहौल गरमा गया, जब प्रभावित ग्रामीणों ने परियोजना प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के सामने अपनी समस्याओं और आपत्तियों की लंबी फेहरिस्त रख दी। जनसुनवाई का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्र के लोगों की चिंताओं और आपत्तियों को सुनना था, लेकिन कई महत्वपूर्ण सवालों पर मौके पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से ग्रामीणों में निराशा और नाराजगी दिखाई दी।

सवाल अनेक, जवाबों की तलाश जारी

जनसुनवाई में ग्रामीणों ने परियोजना से होने वाले धूल और प्रदूषण, जलस्रोतों पर संभावित असर, कृषि भूमि, मकानों, फसलों और आसपास के पर्यावरण को लेकर गंभीर सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना था कि परियोजना का सीधा प्रभाव उनके जीवन, खेती और प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ सकता है। ऐसे में केवल आश्वासन के बजाय उन्हें तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने सवाल किया कि खनन गतिविधियों के कारण धूल और प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में उससे निपटने के लिए क्या ठोस व्यवस्था प्रस्तावित है। वहीं जलस्रोतों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव और कृषि भूमि की सुरक्षा को लेकर भी ग्रामीणों ने अपनी चिंताएं सामने रखीं।

प्रभावित गांवों के नाम और दूरी पर भी सवाल

जनसुनवाई के दौरान पर्यावरणीय दस्तावेजों में दर्ज प्रभावित गांवों की सूची और परियोजना से उनकी दूरी को लेकर भी सवाल उठाए गए। ग्रामीणों का कहना था कि वास्तविक रूप से प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी दस्तावेजों में पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने मांग की कि दस्तावेजों में दर्ज प्रत्येक गांव, जलस्रोत और प्रभावित क्षेत्र का मौके पर सत्यापन कराया जाए, ताकि परियोजना के वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सके। उनका कहना था कि कागजों में दर्ज आंकड़ों और जमीनी स्थिति में अंतर होने की स्थिति में भविष्य में ग्रामीणों की समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

आपत्तियों का अंबार, समाधान का इंतजार

जनसुनवाई में एक के बाद एक आपत्तियां सामने आती रहीं। ग्रामीणों का कहना था कि केवल उनकी आपत्तियां दर्ज कर लेना पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि प्रत्येक आपत्ति पर विभाग और परियोजना प्रबंधन की ओर से स्पष्ट जवाब दिया जाए और यह भी बताया जाए कि उठाई गई समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

ग्रामीणों ने यह सवाल भी उठाया कि यदि जनसुनवाई में गंभीर आपत्तियों पर मौके पर समाधान या स्पष्ट जवाब नहीं मिलते हैं, तो जनसुनवाई की प्रक्रिया का वास्तविक उद्देश्य कैसे पूरा होगा।

ग्रामीण बोले—विकास का विरोध नहीं, नुकसान स्वीकार नहीं

जनसुनवाई के बाद ग्रामीणों में मायूसी और नाराजगी का माहौल दिखाई दिया। ग्रामीणों का कहना था कि वे विकास और रोजगार के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत उनकी जमीन, पानी, खेती और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।

अब ग्रामीणों की नजर परियोजना प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की आगामी कार्रवाई तथा उठाई गई आपत्तियों पर मिलने वाले लिखित जवाब पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जनसुनवाई में दर्ज आपत्तियों पर विभाग और परियोजना प्रबंधन कितनी गंभीरता से कार्रवाई करते हैं और ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान किस स्तर तक हो पाता है।

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