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| सड़क हादसे की आड़ में हत्या का खेल, पत्नी समेत चार गिरफ्तार |
सोनभद्र/रीवा। सोनभद्र जिले के शक्तिनगर थाना क्षेत्र में सड़क किनारे मिले एनसीएल कर्मी रमाशंकर मिश्रा के शव के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जिस घटना को शुरुआती तौर पर सड़क हादसा समझा जा रहा था, जांच आगे बढ़ने पर उसके पीछे कथित हत्या की साजिश सामने आई। पुलिस ने मृतक की पत्नी प्रियंका मिश्रा, उसके कथित प्रेमी विकास चौहान और दो अन्य आरोपियों अनुराग सिंह उर्फ बादल तथा सोनू गुप्ता को गिरफ्तार किया है। 23 अगस्त 2026 को बीना कॉलोनी निवासी और एनसीएल कर्मी रमाशंकर मिश्रा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में सड़क किनारे मिला था। पहली नजर में मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हुआ, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों और तकनीकी जांच के जरिए मामले की तह तक जाने का प्रयास शुरू किया।
मृतक के पिता रामेश मिश्रा की तहरीर पर शक्तिनगर थाने में मुकदमा अपराध क्रमांक 162/2026 दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और अन्य साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया। जांच के दौरान पुलिस के अनुसार मृतक की पत्नी प्रियंका मिश्रा और विकास चौहान के बीच कथित संबंधों की जानकारी सामने आई। पुलिस का कहना है कि 22 अगस्त 2026 को रमाशंकर मिश्रा ने अपनी पत्नी प्रियंका और विकास चौहान को कथित तौर पर एक साथ देख लिया था।
पुलिस के मुताबिक, इसके बाद कथित तौर पर रमाशंकर की हत्या की साजिश रची गई। विकास चौहान ने अपने दो सहयोगियों अनुराग सिंह उर्फ बादल और सोनू गुप्ता की मदद ली। पुलिस का आरोप है कि हत्या के बाद शव को सड़क किनारे इस तरह रखा गया, जिससे पूरा मामला दुर्घटना का रूप ले सके। आरोपियों ने भले ही घटना पर पर्दा डालने की कोशिश की हो, लेकिन पुलिस की तकनीकी जांच ने साजिश की परतें खोल दीं। कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन समेत अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। इसके बाद शक्तिनगर पुलिस ने रीवा जिले के बैकुंठपुर क्षेत्र में दबिश देकर मृतक की पत्नी प्रियंका मिश्रा समेत चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने चारों आरोपियों को 29 अगस्त 2026 को न्यायालय के समक्ष पेश किया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह रही कि जिसे शुरुआत में एक सामान्य सड़क हादसा समझा जा रहा था, जांच में उसके पीछे कथित आपराधिक साजिश सामने आई। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने गुनाह छिपाने के लिए कहानी तो गढ़ी, लेकिन कानून की नजर से बच नहीं सके। यह मामला रिश्तों में विश्वास और अपराध के बीच खड़े गंभीर सवाल भी सामने लाता है। हालांकि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में होने वाली सुनवाई और आगे की जांच के बाद ही होगी। पुलिस की कार्रवाई ने यह जरूर साबित किया कि अपराध के बाद कितनी भी सावधानी से सबूत छिपाने या घटना को दूसरा रूप देने की कोशिश की जाए, जांच एजेंसियों की वैज्ञानिक पड़ताल आखिरकार सच तक पहुंच सकती है।
