![]() |
| जीएमएच में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद फिर वही सवाल: कार्रवाई तो हुई, जांच रिपोर्ट कब आएगी? |
रीवा - विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल गांधी मेमोरियल अस्पताल (जीएमएच) में प्रसव के दौरान महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत के बाद एक बार फिर अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गुरुवार को मृतका के परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों ने उपचार में कथित लापरवाही, समय पर उचित उपचार नहीं मिलने और नर्सिंग स्टाफ के व्यवहार को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
मामला बढ़ने के बाद मनगवां विधायक नरेंद्र प्रजापति अस्पताल पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर उनकी शिकायतें सुनीं। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन एवं मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा हुई। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद प्रथम दृष्टया कार्रवाई करते हुए दो नर्सिंग ऑफिसरों को निलंबित कर दिया गया। साथ ही विभागाध्यक्ष स्तर की जांच समिति गठित कर पूरे मामले की जांच कराने की बात कही गई है।
लेकिन इस कार्रवाई के साथ ही एक बड़ा सवाल भी सामने आया है—क्या हर घटना के बाद निलंबन और जांच समिति ही अंतिम प्रक्रिया रह जाएगी, या जांच की रिपोर्ट भी सार्वजनिक होगी?
25 अगस्त को भर्ती हुई थी महिला
परिजनों के अनुसार मंडवा निवासी कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए 25 अगस्त को जीएमएच में भर्ती कराया गया था। 25 और 26 अगस्त की दरमियानी रात करीब एक बजे प्रसव संबंधी उपचार के दौरान महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया।
गुरुवार को परिजन अस्पताल पहुंचे और उपचार प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विरोध शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि समय रहते उचित उपचार नहीं मिला और उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। नर्सिंग स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी परिजनों ने आपत्ति जताई। ऑपरेशन थिएटर में कथित रूप से पैसे मांगने का आरोप भी लगाया गया है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यही कारण है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
‘दैनिक आज तक 24’ की खबरों के बाद भी रिपोर्ट का इंतजार?
अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। दैनिक आज तक 24 समाचार द्वारा अस्पताल की अव्यवस्थाओं से संबंधित खबरें प्रकाशित किए जाने के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि पूर्व में सामने आए मामलों की जांच का अंतिम निष्कर्ष और रिपोर्ट अब तक सामने क्यों नहीं आई।
यदि किसी मामले में जांच समिति गठित होती है तो उसकी रिपोर्ट का क्या हुआ? किन मामलों में लापरवाही साबित हुई? कितने मामलों में कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई और कितने मामलों में आरोप निराधार पाए गए? इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होना इसलिए भी जरूरी हैं, क्योंकि लगातार होने वाली घटनाओं से अस्पताल की कार्यप्रणाली पर जनता का भरोसा प्रभावित होता है।
क्या हर बार जांच के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है?
इस घटना में दो नर्सिंग ऑफिसरों का निलंबन और जांच समिति का गठन निश्चित रूप से कार्रवाई की शुरुआत है, लेकिन असली कसौटी जांच की निष्पक्षता और उसके परिणाम पर होगी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जांच में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ या अन्य किसी कर्मचारी की जिम्मेदारी सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पर सवाल यह है कि जांच कब पूरी होगी और उसकी रिपोर्ट कब सामने आएगी? यदि लापरवाही नहीं हुई तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए, और यदि लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी दिखाई देनी चाहिए।
मौके पर जनप्रतिनिधियों को सूचना क्यों नहीं?
घटना के बाद यह सवाल भी चर्चा में है कि विंध्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में इतनी गंभीर घटना होने के बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई। जीएमएच के आसपास ही कई जनप्रतिनिधियों के निवास और राजनीतिक संपर्क क्षेत्र होने के बावजूद अस्पताल की व्यवस्था और अव्यवस्था की जानकारी उन्हें घटनाओं के बाद ही क्यों मिलती है, यह भी विचारणीय प्रश्न है।
जनप्रतिनिधियों का काम केवल घटना के बाद अस्पताल पहुंचकर परिजनों को आश्वासन देना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी और समस्याओं को शासन तक पहुंचाना भी है।
मौत का कारण जांच से ही होगा स्पष्ट
हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि अस्पताल में होने वाली प्रत्येक चिकित्सकीय मौत को स्वतः चिकित्सकीय लापरवाही नहीं माना जा सकता। कई गंभीर परिस्थितियों में चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद मरीज को बचाना संभव नहीं होता। इसलिए कल्पना मिश्रा और नवजात की मौत के वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट, उपचार रिकॉर्ड और जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होंगे।
फिलहाल जीएमएच में एक बार फिर निलंबन बनाम जांच रिपोर्ट का सवाल खड़ा है। क्या यह घटना एक आकस्मिक चिकित्सकीय त्रासदी थी, व्यवस्था की गंभीर कमी का परिणाम थी या कहीं लापरवाही हुई—इसका जवाब जांच से ही मिलेगा। लेकिन यदि जांच रिपोर्ट समय पर सामने नहीं आती, तो हर नई घटना के साथ पुराने सवाल और गहरे होते जाएंगे।
