11 दिन जेल में रहा बेगुनाह? जमानत के बाद उठे पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल

11 दिन जेल में रहा बेगुनाह? जमानत के बाद उठे पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल

शहडोल। सोहागपुर थाना क्षेत्र के पाली रोड स्थित ‘यम्मी स्पाइसी होटल’ के पास हुए विवाद के मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पठानी बस्ती वार्ड क्रमांक-3 निवासी हामिद खान उर्फ लल्लू के परिवार का आरोप है कि पुलिस ने गलत पहचान के आधार पर उन्हें मामले में आरोपी बना दिया, जिसके चलते उन्हें करीब 11 दिन जेल में रहना पड़ा। अदालत से जमानत मिलने के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हामिद खान का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। परिवार के मुताबिक हामिद बकरा-बकरी पालन और चरवाही का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पत्नी परवीन बेगम का दावा है कि जिस दिन 26 जुलाई 2026 को विवाद हुआ, उस दिन शाम करीब 7 बजे हामिद घर पर मौजूद थे और सो रहे थे। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें पूछताछ के नाम पर थाने बुलाया और कथित तौर पर कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए।

‘लल्लू’ नाम को लेकर सामने आया विवाद

परवीन बेगम का आरोप है कि पुलिस ने हामिद को यह कहकर थाने बुलाया था कि घटना में शामिल ‘लल्लू’ कोई दूसरा व्यक्ति है और हामिद के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी। परिवार का दावा है कि बाद में उन्हें उसी मामले में आरोपी बना दिया गया। परिवार का कहना है कि यदि पुलिस के पास घटनास्थल या आसपास के सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए। मामले में न्यायिक प्रक्रिया के तहत हामिद को अदालत से जमानत मिल चुकी है। इसके बाद परिवार ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उच्च अधिकारियों से शिकायत की है।

IG-SP से लेकर जनसुनवाई तक पहुंची शिकायत

अपने पति को न्याय दिलाने के लिए परवीन बेगम ने 10 अगस्त 2026 को पुलिस महानिरीक्षक शहडोल और पुलिस अधीक्षक शहडोल को शिकायत दी। इसके बाद 11 अगस्त को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में भी उन्होंने आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। परवीन बेगम का कहना है कि यदि सीसीटीवी फुटेज में उनके पति की घटना में मौजूदगी साबित होती है तो वह न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करेंगी, लेकिन यदि फुटेज उनकी गैरमौजूदगी साबित करता है तो पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

जमानत के बाद पीड़ित परिवार ने अब मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाने की बात कही है। परवीन बेगम का कहना है कि उनके पति की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और उन्हें जेल में 11 दिन मानसिक एवं शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ी। परिवार ने उचित जांच, दोषियों की जवाबदेही और नुकसान की भरपाई की मांग उठाई है। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि किसी व्यक्ति को आरोपी बनाने से पहले पहचान और उपलब्ध साक्ष्यों का पर्याप्त सत्यापन हुआ था या नहीं। अब पूरे मामले में सीसीटीवी फुटेज, पुलिस की केस डायरी, दर्ज बयानों और जांच में सामने आए साक्ष्यों की निष्पक्ष समीक्षा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं पुलिस और प्रशासन की ओर से मामले में आधिकारिक रूप से क्या जवाब सामने आता है, इस पर भी लोगों की नजर है।

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