| टपकती छत के नीचे भविष्य की पढ़ाई! जर्जर स्कूल भवन में नौनिहाल, जिम्मेदारों की नजर कब पड़ेगी? |
शहडोल - जिले में सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षित माहौल के दावों के बीच जयसिंहनगर क्षेत्र का एक विद्यालय इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहा है। संकुल केंद्र बराछ के अंतर्गत जन शिक्षा केंद्र जयसिंहनगर क्षेत्र के शासकीय प्राथमिक विद्यालय कोइलरी में जर्जर भवन और टपकती छत के बीच बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है। बारिश होते ही स्कूल की छत से पानी टपकने लगता है और कई जगह दीवारों से प्लास्टर झड़ रहा है।
सबसे चिंताजनक स्थिति उस कक्ष की बताई जा रही है, जिसका उपयोग मध्यान्ह भोजन तैयार करने के लिए किया जाता है। बारिश के दौरान इस कक्ष में पानी भर जाने से बच्चों के भोजन की व्यवस्था भी प्रभावित होने की स्थिति बन जाती है। विद्यालय में पदस्थ प्रधानाध्यापक एवं स्टाफ का कहना है कि भवन लंबे समय से जर्जर हालत में है और इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
निरीक्षण होता है, कार्रवाई क्यों नहीं?
स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल क्षेत्र में भ्रमण करने वाले बीएसी और सीएसी की भूमिका को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि संबंधित अधिकारी विद्यालयों का निरीक्षण तो करते हैं, लेकिन जर्जर भवन जैसी गंभीर समस्या को उच्च स्तर तक पहुंचाकर उसके समाधान के लिए प्रभावी पहल नहीं होती। यदि निरीक्षण के दौरान भवन की स्थिति सामने आती है तो फिर मरम्मत अथवा वैकल्पिक व्यवस्था अब तक क्यों नहीं की गई, यह सवाल जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांग रहा है।
मरम्मत के नाम पर राशि, फिर भी भवन बेहाल?
स्थानीय सूत्रों द्वारा सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूल भवनों के मरम्मत कार्य के लिए राशि आने और कार्य नहीं होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि विद्यालय की मरम्मत के लिए पूर्व में कितनी राशि स्वीकृत या जारी हुई, उसका उपयोग कहां और किस कार्य में किया गया तथा भवन की मौजूदा स्थिति इतनी खराब क्यों बनी हुई है।
बरसात के मौसम में जर्जर छत और कमजोर दीवारें बच्चों और स्कूल स्टाफ की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकती हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ भवन की मरम्मत का नहीं, बल्कि नौनिहालों की सुरक्षा और उनके पढ़ने के अधिकार का भी है। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस मामले को महज निरीक्षण की रिपोर्ट तक सीमित रखता है या फिर जर्जर भवन की वास्तविक स्थिति की जांच कर तत्काल मरम्मत, वैकल्पिक कक्ष और बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाता है।