डिप्टी सीएम के घर से 300 मीटर दूर जर्जर मकान गिरने से ऑटो चालक की मौत

डिप्टी सीएम के घर से 300 मीटर दूर जर्जर मकान गिरने से ऑटो चालक की मौत

रीवा। लगातार हो रही बारिश ने रीवा संभाग में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। गांवों से लेकर शहरों तक जलभराव, जर्जर भवन और अवरुद्ध नालियां लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। इसी बीच रीवा शहर के वार्ड क्रमांक-23 में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसे में 22 वर्षीय ऑटो चालक समीर खान की जर्जर मकान का छज्जा और सीढ़ियां गिरने से मौत हो गई। यह घटना उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के आवास से लगभग 300 मीटर पीछे अमहिया क्षेत्र में हुई, जिसने शहरी जल निकासी व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जलभराव के बीच ढहा जर्जर मकान

स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में पिछले चार-पांच दिनों से करीब पांच फीट तक पानी भरा हुआ था। नाले के किनारे स्थित पुराना मकान लगातार पानी में भीगने से कमजोर हो चुका था। मंगलवार को जब समीर खान भोजन करने के लिए घर की ओर जा रहा था, तभी अचानक मकान का छज्जा और सीढ़ियां भरभराकर गिर गईं। मलबे में दबने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

बड़ी मां ने पाला था, ऑटो चलाकर करता था परिवार का गुजारा

समीर खान का बचपन बेहद संघर्षों में बीता था। परिवार के अनुसार बचपन में ही उसके माता-पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उसकी बड़ी मां ने उसे पाल-पोसकर बड़ा किया। वह ऑटो चलाकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। हादसे के बाद बड़ी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग करते हुए कहा कि परिवार अंतिम संस्कार तक के खर्च के लिए परेशान है और सरकार को गरीब परिवार की मदद करनी चाहिए।

पार्षद ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

वार्ड क्रमांक-23 के पार्षद अकरम अंसारी ने हादसे के लिए प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि क्षेत्र में कई दिनों से पानी भरा हुआ था और जर्जर मकानों की स्थिति पहले से गंभीर थी, लेकिन न तो पटवारी पहुंचे, न तहसीलदार और न ही किसी विभाग ने सर्वे कर आवश्यक कार्रवाई की। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे के बाद भी राहत और सहायता के लिए प्रशासनिक अमला समय पर नहीं पहुंचा।

बारिश से उजागर हुई तैयारियों की कमी

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हर वर्ष जून और जुलाई में मानसून से पहले जल निकासी, नालों की सफाई और जर्जर भवनों की पहचान का अभियान प्रभावी ढंग से क्यों नहीं चलाया जाता। विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि बाढ़ केवल प्राकृतिक बारिश का परिणाम नहीं है, बल्कि अवरुद्ध जल निकासी, अतिक्रमण और उपेक्षित शहरी ढांचे जैसी मानव निर्मित समस्याएं भी इसके बड़े कारण हैं।

स्थायी समाधान की मांग

लगातार हो रहे हादसों के बाद नागरिकों ने मांग की है कि मानसून पूर्व व्यापक सर्वे कर जर्जर भवनों को चिन्हित किया जाए, जल निकासी तंत्र को दुरुस्त किया जाए और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए स्थायी कार्ययोजना बनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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