‘हम तुम्हारे नौकर नहीं हैं’—पुलिस पर संवेदनहीनता का आरोप, घायल वृद्ध को थाने के बाहर करना पड़ा इंतजार

‘हम तुम्हारे नौकर नहीं हैं’—पुलिस पर संवेदनहीनता का आरोप, घायल वृद्ध को थाने के बाहर करना पड़ा इंतजार

शहडोल। गंभीर चोट से जूझ रहे एक वृद्ध के मामले में जैतपुर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर पीड़ित परिवार ने गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि घायल अवस्था में सतेंद्र सिंह को मदद के लिए जैतपुर थाने पहुंचने के बावजूद तत्काल सहायता नहीं मिली। थाना परिसर के आसपास पुलिस वाहन मौजूद होने के बावजूद पुलिस की ओर से समय पर मदद नहीं मिलने का दावा किया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। पीड़ित पक्ष के अनुसार, काफी देर तक सहायता नहीं मिलने के बाद मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर शिकायत की गई, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। परिवार का आरोप है कि घायल सतेंद्र सिंह को थाने के बाहर काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के प्रति पुलिस की संवेदनशीलता और तत्काल सहायता की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अस्पताल से लौटने के बाद भी कथित दुर्व्यवहार

परिवार का कहना है कि अस्पताल में उपचार कराने के बाद जब सतेंद्र सिंह दोबारा थाने पहुंचे तो पुलिसकर्मियों के कथित व्यवहार से उनकी परेशानी और बढ़ गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस स्टाफ की ओर से कथित तौर पर यह कहा गया कि “हम तुम्हारे नौकर नहीं हैं। हालांकि इस कथित बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से भी अभी इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यदि ऐसा व्यवहार हुआ है तो यह सवाल जरूर उठता है कि गंभीर चोट से पीड़ित शिकायतकर्ता के साथ थाने में पुलिस का रवैया कैसा होना चाहिए और क्या न्याय की मांग कर रहे व्यक्ति को अपनी शिकायत के लिए बार-बार थाने के चक्कर लगाने पड़ने चाहिए।

राजीनामे के दबाव का भी आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोप कथित रूप से समझौता कराने के दबाव का है। पीड़ित परिवार का दावा है कि पुलिसकर्मियों के साथ हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है। परिवार का कहना है कि बातचीत में मामले को खत्म करने और राजीनामा करने के लिए दबाव बनाए जाने की बात सामने आती है। हालांकि किसी भी ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रमाणिकता केवल उसके तकनीकी परीक्षण और निष्पक्ष जांच के बाद ही तय हो सकती है। ऐसे में परिवार ने वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि कथित रिकॉर्डिंग की जांच के साथ पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।

एक माह बाद भी गिरफ्तारी पर सवाल

पीड़ित परिवार का दावा है कि घटना को एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन नामजद आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का आरोप है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और उन्हें कार्रवाई का कोई भय नहीं है। पीड़ित पक्ष का सवाल है कि यदि घटना में गंभीर मारपीट के आरोप हैं तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है। परिवार ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के मामलों में पुलिस की कार्रवाई की गति अलग क्यों दिखाई देती है। हालांकि इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

अब कलेक्टर की चौखट पर न्याय की उम्मीद

थाना स्तर पर न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवार अब जिला प्रशासन के पास पहुंचा है। जनसुनवाई में शिकायत के बाद मामले में कलेक्टर और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। परिवार ने मांग की है कि मेडिकल रिपोर्ट, उपचार संबंधी दस्तावेज, घटनास्थल की जांच, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए। साथ ही यदि पुलिसकर्मियों द्वारा राजीनामे का दबाव बनाए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधितों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।

अब ये सवाल मांग रहे जवाब

  • गंभीर फ्रैक्चर और ऑपरेशन के बावजूद धाराओं की समीक्षा क्यों नहीं हुई?
  • मेडिकल दस्तावेज पुलिस के पास पहुंचने के बाद जांच में क्या बदलाव किया गया?
  • नामजद आरोपियों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई हुई?
  • क्या पीड़ित परिवार पर राजीनामे का दबाव बनाया गया?
  • कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की निष्पक्ष जांच कब होगी?
  • जनसुनवाई के बाद जिला प्रशासन मामले की जांच किस अधिकारी से कराएगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि पीड़ित परिवार के आरोप सही हैं तो चोट की गंभीरता के अनुरूप पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि आरोप गलत हैं, तो निष्पक्ष जांच के जरिए इन सभी सवालों का जवाब कब सामने आएगा?

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