| हाईकोर्ट के आदेश से निरस्त हुआ तबादला, शहडोल नगरपालिका में लौटीं CMO आशा भंडारी |
शहडोल। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ के आदेश के बाद शहडोल नगरपालिका परिषद की प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। न्यायालय ने मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा 2 जून 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश को निरस्त कर दिया। इसके बाद नगरपालिका परिषद शहडोल में पदस्थ मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO वर्ग-ए) श्रीमती आशा भंडारी (मेड़ा) ने 1 सितंबर 2026 को पुनः नगरपालिका में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मामला स्थानांतरण आदेश और अधिकारी के सेवा वर्ग से जुड़े नियमों की व्याख्या से संबंधित था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, याचिका क्रमांक 19777/2026 पर 11 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट जबलपुर की एकल पीठ में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति विशाल धगट की पीठ ने मामले में संबंधित सेवा नियमों और नगरपालिका से जुड़े प्रावधानों पर विचार करते हुए स्थानांतरण आदेश को निरस्त किया।
सेवा वर्ग और नियमों पर अदालत ने की स्पष्टता
मामले में यह मुद्दा प्रमुख था कि वर्ष 2014 में वर्ग-ए मुख्य नगरपालिका अधिकारी के पद पर पदोन्नत अधिकारी को सेवा नियमों के अनुरूप किस प्रकार की नगरपालिका में पदस्थ किया जा सकता है। न्यायालय के आदेश के अनुसार, अधिकारी के सेवा वर्ग और पद की प्रकृति से जुड़े नियमों को ध्यान में रखना आवश्यक है। फैसले में मध्यप्रदेश नगरपालिका सेवा नियमों तथा नगरपालिका अधिनियम से संबंधित प्रावधानों की व्याख्या की गई। इसी आधार पर शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश को निरस्त किया गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद श्रीमती आशा भंडारी ने 1 सितंबर को नगरपालिका परिषद शहडोल में पुनः कार्यभार संभालने की प्रक्रिया पूरी की। इससे नगरपालिका के प्रशासनिक कामकाज में निरंतरता बनी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
नियमों के पालन को लेकर उठी उम्मीद
न्यायालय के फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर सेवा नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पालन को लेकर चर्चा तेज हुई है। जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का कहना है कि प्रशासनिक निर्णय स्पष्ट नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप लिए जाने चाहिए। उनका मानना है कि नियमों की स्पष्टता और न्यायिक समीक्षा से स्थानीय निकायों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत हो सकती है। शहर में अतिक्रमण, सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा, निर्माण कार्यों की निगरानी और विकास योजनाओं जैसे विषयों पर नगरपालिका की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर निरंतरता को शहर के विकास कार्यों के लिए भी अहम माना जा रहा है।
न्यायिक आदेश के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर नजर
इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी रेखांकित किया है कि स्थानीय निकायों में अधिकारियों की पदस्थापना और स्थानांतरण से जुड़े निर्णयों में सेवा नियमों का पालन कितना महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब नगरपालिका परिषद शहडोल में प्रशासनिक कामकाज किस तरह आगे बढ़ता है और लंबित विकास कार्यों को कितनी गति मिलती है, इस पर नागरिकों की नजर रहेगी। न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए CMO के पुनः पदभार संभालने से नगरपालिका में प्रशासनिक निरंतरता स्थापित हुई है। स्थानीय स्तर पर इसे नियमों और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति विश्वास मजबूत करने वाले घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।