जमुई के जंगल में ‘52 पत्ती’ का खेल! कार्रवाई की सूचना कैसे पहुंचती है? सोहागपुर पुलिस की भूमिका पर भी उठे गंभीर सवाल

जमुई के जंगल में ‘52 पत्ती’ का खेल! कार्रवाई की सूचना कैसे पहुंचती है? सोहागपुर पुलिस की भूमिका पर भी उठे गंभीर सवाल

सोहागपुर - जमुई के जंगल में कथित तौर पर लंबे समय से संचालित हो रहे बड़े जुए के फड़ को लेकर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि यहां दूर-दराज के क्षेत्रों और अलग-अलग जिलों से लोग पहुंचकर लाखों रुपये का दांव लगाते हैं। कथित रूप से जुए का यह खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जमुई के जंगल में इतने बड़े स्तर पर जुआ खेला जा रहा है तो इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस तक क्यों नहीं पहुंची? और यदि पुलिस को इसकी जानकारी थी, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यही सवाल अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

कार्रवाई की सूचना आखिर कैसे पहुंचती है?

मामले में एक और गंभीर सवाल कार्रवाई की सूचना कथित रूप से पहले ही पहुंच जाने को लेकर उठाया जा रहा है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि जब भी पुलिस कार्रवाई की तैयारी करती है, तो कथित रूप से जुआरियों तक इसकी भनक पहले ही पहुंच जाती है और फड़ खाली होने की बात सामने आती है।

हालांकि, कार्रवाई की सूचना लीक होने या पुलिस की संलिप्तता का कोई आधिकारिक प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है। ऐसे में यह आरोप जांच का विषय है। यदि वास्तव में पुलिस कार्रवाई से पहले किसी माध्यम से जुआरियों तक सूचना पहुंच रही है, तो यह पुलिस की गोपनीयता और सूचना तंत्र दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सोहागपुर पुलिस की भूमिका पर भी सवाल

सबसे गंभीर आरोप सोहागपुर थाना पुलिस की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि थाना स्तर पर कथित रूप से जुआ खेलने वालों को खुली छूट मिल रही है। हालांकि पुलिस की ओर से किसी प्रकार के संरक्षण या संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में जरूरी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि जमुई के जंगल में यदि वास्तव में बड़े स्तर पर जुए का फड़ संचालित हो रहा है, तो स्थानीय पुलिस और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं।

अलग-अलग जिलों से पहुंच रहे लोग तो भनक क्यों नहीं?

बताया जा रहा है कि जमुई के जंगल में कथित जुए के खेल में आसपास के क्षेत्रों के अलावा अन्य जिलों से भी लोग पहुंचते हैं। यदि यह दावा सही है तो इतने बड़े स्तर पर लोगों की आवाजाही और लाखों रुपये के कथित दांव के बावजूद स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

क्या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं थी? क्या जंगल क्षेत्र में नियमित निगरानी नहीं होती? क्या मुखबिर तंत्र इस पूरे मामले से अनजान रहा? या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई? इन सवालों के जवाब अब पुलिस प्रशासन से अपेक्षित हैं।

एसपी की निगाह से कब तक दूर रहेगा ‘जुए का साम्राज्य’?

जुआ केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके चलते परिवारों पर आर्थिक संकट, विवाद और अन्य सामाजिक समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में यदि जमुई के जंगल में वास्तव में बड़े स्तर पर जुए का आयोजन हो रहा है तो मामला केवल एक जुआ फड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुलिस की निगरानी व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की कार्यप्रणाली से भी जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।

अब नजर पुलिस अधीक्षक की कार्रवाई पर है। क्या जमुई के जंगल में चल रहे कथित बड़े जुए के फड़ की जांच होगी? क्या कार्रवाई की सूचना लीक होने के आरोपों की पड़ताल की जाएगी? क्या सोहागपुर पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच होगी? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई होगी?

‘हॉर्नीबल टी.वी. तहलका भारत’ के वीडियो में अतीक द्वारा किए गए कथित खुलासों के बाद इन सवालों को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और जमुई के जंगल में चल रही कथित ‘52 पत्ती’ की महफिल पर कब तक प्रभावी शिकंजा कसता है।

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