आवास प्लस में शिकायत पर जिला पंचायत सीईओ की त्वरित कार्रवाई, उसी दिन जांच और अपात्र हितग्राहियों को हटाने की अनुशंसा

आवास प्लस में शिकायत पर जिला पंचायत सीईओ की त्वरित कार्रवाई, उसी दिन जांच और अपात्र हितग्राहियों को हटाने की अनुशंसा

शहडोल/गोहपारू - ग्राम पंचायत चुहिरी में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना (आवास प्लस) की पात्रता सूची को लेकर उठी शिकायत पर जिला पंचायत शहडोल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की त्वरित कार्रवाई सामने आई है। ग्रामवासियों द्वारा 25 अगस्त 2026 को लिखित आवेदन देकर वास्तविक पात्र एवं गरीब परिवारों के नाम आवास सूची में जोड़ने तथा अपात्र हितग्राहियों के नाम हटाने की मांग की गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत शहडोल ने उसी दिन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत गोहपारू को जांच के निर्देश दिए। निर्देश प्राप्त होते ही जनपद पंचायत गोहपारू की टीम द्वारा ग्राम पंचायत चुहिरी में पहुंचकर संबंधित आवास प्रकरणों का भौतिक सत्यापन किया गया। जांच के दौरान शिकायत में बताए गए संदिग्ध हितग्राहियों के आवासों का सर्वे किया गया और जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार जांच में अपात्र पाए गए हितग्राहियों को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के लाभ से वंचित किए जाने की अनुशंसा की गई है।

पूर्व जांच पर उठे थे सवाल

ग्राम पंचायत चुहिरी में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना (आवास प्लस) के सर्वे एवं सत्यापन को लेकर ग्रामवासियों द्वारा पूर्व में भी शिकायत की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पात्रता के निर्धारित मापदंडों की अनदेखी करते हुए कुछ ऐसे लोगों के नाम आवास की पात्र सूची में शामिल किए गए हैं, जिनके पास पक्के मकान, पर्याप्त कृषि भूमि, ट्रैक्टर, चार पहिया वाहन अथवा अन्य संसाधन उपलब्ध हैं। वहीं दूसरी ओर वास्तविक गरीब एवं जरूरतमंद परिवार योजना के लाभ से वंचित बताए गए। पूर्व में हुई जांच में केवल दो प्रकरणों—श्री दिनेश टांडिया, सरपंच तथा श्री रामवचन गौतम—की जांच किए जाने और उन्हें अपात्र पाए जाने की जानकारी सामने आई थी। ग्रामवासियों का कहना था कि शिकायत में उल्लेखित अन्य प्रकरणों की भी इसी तरह स्थल निरीक्षण एवं अभिलेखीय जांच होना आवश्यक है।

पूरे सर्वे और सत्यापन की जांच की मांग

मामले में ग्रामवासियों ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के आवास प्लस सर्वे एवं सत्यापन से जुड़े कार्य की व्यापक जांच की मांग की है। विशेष रूप से ब्लॉक समन्वयक, आजीविका मिशन श्री पद्मेश तिवारी द्वारा किए गए सर्वे एवं सत्यापन की भी जांच की मांग उठाई गई है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार यह देखा जाना आवश्यक है कि सर्वे के दौरान प्रत्येक परिवार की पात्रता निर्धारित करने के लिए किन दस्तावेजों और तथ्यों का परीक्षण किया गया तथा क्या वास्तविक स्थल निरीक्षण किया गया था। साथ ही पूर्व में योजना का लाभ प्राप्त कर चुके परिवारों की पुनः पात्रता निर्धारित किए जाने के आधार की भी जांच की मांग की गई है।

ग्राम रोजगार सहायक के पिता के आवास की भी जांच की मांग

शिकायत में ग्राम पंचायत चुहिरी में पदस्थ ग्राम रोजगार सहायक के पिता के नाम प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना का आवास स्वीकृत किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है। शिकायत के अनुसार संबंधित व्यक्ति सेवानिवृत्त कॉलरी कर्मचारी हैं। ऐसे में उनकी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति, पेंशन अथवा अन्य आय, कृषि भूमि, संपत्ति तथा वर्तमान आवास की स्थिति के आधार पर पात्रता की जांच की मांग की गई है। इसके साथ ही यह भी मांग की गई है कि संबंधित आवास प्रकरण में ग्राम रोजगार सहायक, सरपंच, सचिव अथवा अन्य पंचायत पदाधिकारियों की किसी प्रकार की भूमिका, अनुशंसा, सत्यापन या हित-संघर्ष रहा है या नहीं, इसकी भी निष्पक्ष जांच हो।

सीईओ की तत्परता से कार्रवाई की उम्मीद बढ़ी

ग्रामवासियों द्वारा 25 अगस्त को आवेदन दिए जाने और उसी दिन जांच के निर्देश जारी होने तथा जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जाने से ग्रामीणों में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर उम्मीद बढ़ी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि इसी तरह समयबद्ध तरीके से कार्रवाई आगे भी जारी रहती है तो आवास योजना में वास्तविक पात्र परिवारों को उनका हक दिलाने और अपात्र लोगों को योजना के लाभ से बाहर करने में मदद मिलेगी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आवास के लाभ से वंचित रह गए वास्तविक पात्र परिवारों के नाम किस प्रक्रिया के तहत जोड़े जाएंगे और उनके आवास प्रकरणों का पुनः परीक्षण कब तक पूरा होगा। इसके साथ ही यदि पूर्व में किसी अपात्र व्यक्ति को पात्र घोषित करने में किसी अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि अथवा अन्य व्यक्ति की भूमिका जांच में सामने आती है, तो संबंधित के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर भी ग्रामीणों की नजर रहेगी।

कार्रवाई आगे भी जारी रहने की उम्मीद

ग्रामवासियों की मांग है कि मामले को केवल कुछ अपात्र हितग्राहियों को योजना से बाहर करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि आवास प्लस की पूरी सूची, सर्वे, सत्यापन, पात्रता निर्धारण और स्वीकृति प्रक्रिया का नियमानुसार परीक्षण किया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि योजना का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचा है या नहीं। फिलहाल, शिकायत मिलने के बाद उसी दिन जांच के निर्देश और उसी दिन भौतिक सत्यापन की कार्रवाई जिला पंचायत प्रशासन की तत्परता को दर्शाती है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह कार्रवाई आगे भी इसी गति से जारी रहेगी और पात्र परिवारों को आवास का लाभ दिलाने के साथ-साथ यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर भी नियमानुसार कार्रवाई होगी। ग्रामवासियों ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की त्वरित पहल की सराहना करते हुए उम्मीद जताई है कि इस मामले की अंतिम कार्रवाई भी पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाएगी।

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