
जलभराव ने खोली करोड़ों के खर्च की पोल, गढ़ में सैकड़ों घर-दुकानों में घुसा पानी
गढ़/रीवा - ग्राम पंचायत गढ़, जनपद पंचायत गंगेव और तहसील मनगवां क्षेत्र में बुधवार और गुरुवार को हुई भारी बारिश ने जल निकासी व्यवस्था की बदहाली की पोल खोल दी। गढ़ बस्ती के कई हिस्सों में बारिश का पानी सड़कों पर जमा होने के बाद सैकड़ों घरों और दुकानों में घुस गया। अचानक आई बाढ़ जैसी स्थिति से लोगों में अफरा-तफरी मच गई। घरों में रखा राशन, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान और दुकानों का व्यापारिक माल पानी की चपेट में आने से लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
ऊंचाई पर बसी बस्ती, फिर भी जलभराव
स्थानीय लोगों के अनुसार गढ़ बस्ती भौगोलिक रूप से ऊंचाई पर स्थित है। पहले बारिश के पानी की प्राकृतिक निकासी दक्षिण-पश्चिम दिशा में होती थी, लेकिन समय के साथ सड़क किनारे पर्याप्त नालियों का निर्माण नहीं होने, सीमांकन और नापजोख की कमी तथा जगह-जगह निजी निर्माण के कारण पानी के पुराने रास्ते बाधित हो गए। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क किनारे बनी अथवा प्रस्तावित नालियों को कई जगह पाट दिया गया है। इसके कारण बारिश का पानी प्राकृतिक रास्ते से निकलने के बजाय बस्ती के निचले हिस्सों में जमा होकर घरों और दुकानों में पहुंच रहा है।
पुलियों के निकासी मार्ग भी बाधित
स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़-नईगढ़ी मार्ग पर तीन, गढ़-लालगांव प्रधानमंत्री सड़क पर चार तथा पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर दो पुलियों के माध्यम से पानी की निकासी होती थी। कई स्थानों पर पुलियों के आसपास निर्माण और अन्य अवरोधों के कारण पानी का बहाव प्रभावित होने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। ग्रामीणों के मुताबिक पहले मानसून से पहले पुराने हाईवे की पटरियों पर जल निकासी के लिए नालियों की सफाई और खुदाई की जाती थी, लेकिन अब कई स्थानों पर पक्के निर्माण और अन्य अवरोधों के कारण जल निकासी व्यवस्था कमजोर हो गई है।
खाद गोदामों में भी पानी घुसा
जलभराव का असर कृषि सहकारी समितियों के खाद भंडारण पर भी पड़ा। ग्रामीणों के अनुसार परासी पैक्स सोसायटी के गोदाम में पानी भरने से करीब 30 टन यूरिया और 10 टन डीएपी प्रभावित होने की स्थिति बनी। वहीं हिनौती पैक्स सोसायटी में करीब 150 बोरी यूरिया और 100 बोरी डीएपी के पानी की चपेट में आने की बात कही जा रही है। हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
25 साल में करोड़ों खर्च, फिर भी समस्या बरकरार
गढ़ के रहवासियों ने जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले करीब 25 वर्षों में नालियों और जल निकासी व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद पूरी बस्ती की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि नालियों का निर्माण मुख्य रूप से बाजार क्षेत्र तक सीमित रहा, जबकि बस्ती के संपूर्ण जल निकासी तंत्र के लिए कोई समग्र मास्टर प्लान तैयार नहीं किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क, पटरी, पुलिया और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों का सीमांकन कर अतिक्रमण हटाया जाता तथा पर्याप्त चौड़ाई की नालियां बनाई जातीं तो भारी बारिश के दौरान ऐसी स्थिति नहीं बनती।
घरों और दुकानों में घुसा पानी
पानी का स्तर बढ़ते ही लोग घरों में रखा सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए। दुकानदारों ने भी अपना व्यापारिक सामान बचाने के लिए मशक्कत की। अचानक पानी घुसने से कई परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक जलभराव रहने से मकानों की नींव और दुकानों को भी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
प्रशासनिक अमला पहुंचा मौके पर
जलभराव की सूचना मिलने के बाद एसडीएम मनगवां के निर्देश पर नायब तहसीलदार वृत्त गढ़ अजय मिश्रा और पटवारी देवेंद्र तिवारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर जलभराव की स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित लोगों से जानकारी ली। अब लोगों की नजर प्रशासन द्वारा किए जाने वाले क्षति आकलन और राहत कार्रवाई पर है।
स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे कस्बे में राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर सड़क और पटरी का सीमांकन कराने, सार्वजनिक नालियों एवं जल निकासी मार्गों से अवरोध हटाने तथा पुलियों की निकासी व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। साथ ही पूरे गढ़ क्षेत्र का सर्वे कर वैज्ञानिक आधार पर स्थायी जल निकासी मास्टर प्लान तैयार करने की मांग की गई है।अब सवाल तत्काल पानी निकालने तक सीमित नहीं है। जब ऊंचाई पर बसी गढ़ बस्ती में भारी बारिश के दौरान सैकड़ों घरों में पानी घुस सकता है, तो वर्षों से जल निकासी व्यवस्था पर खर्च की गई राशि और उसके परिणामों की समीक्षा कौन करेगा? ग्रामीणों का कहना है कि यदि अभी स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाली बारिश में स्थिति और गंभीर हो सकती है।