प्रसव कक्ष में पुरुष कर्मचारियों की मौजूदगी पर उठे गंभीर सवाल, संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्था पर जांच की मांग

प्रसव कक्ष में पुरुष कर्मचारियों की मौजूदगी पर उठे गंभीर सवाल, संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्था पर जांच की मांग

रीवा - संजय गांधी अस्पताल रीवा से सामने आए एक वीडियो ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और प्रसव कक्ष में मरीजों की सुरक्षा एवं गरिमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला कल्पना मिश्रा के आसपास पुरुष कर्मचारी दिखाई दे रहे हैं। महिला के हाथ को जिस तरह से पकड़ा गया है, उसे देखकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रसव कक्ष में मरीज की देखभाल के लिए प्रशिक्षित महिला चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ मौजूद था?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रसव कक्ष में दिखाई दे रहे पुरुष कर्मचारी डॉक्टर हैं या आउटसोर्स कर्मचारी? यदि वे आउटसोर्स कर्मचारी हैं तो उन्हें प्रसव कक्ष जैसी संवेदनशील जगह पर किस नियम और किस अधिकारी के आदेश से जिम्मेदारी दी गई थी? प्रसव पीड़ा में तड़प रही महिला का हाथ पकड़ने का तरीका भी वीडियो में सवाल खड़े करता है—ऐसा प्रतीत होता है मानो मरीज को संभालने के बजाय उसके साथ जोर-जबरदस्ती की जा रही हो।

महिला डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ कहां था?

प्रसव जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में महिला मरीज की निजता, सम्मान और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में यह जांच का विषय है कि घटना के समय महिला डॉक्टर, प्रशिक्षित नर्स एवं आवश्यक मेडिकल स्टाफ मौके पर मौजूद क्यों नहीं था? यदि मौजूद था तो वीडियो में पुरुष कर्मचारियों की भूमिका क्या थी?

अस्पताल को आउटसोर्स कर्मचारियों के हवाले करने का आरोप

संजय गांधी अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच इस घटना ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि अस्पताल में कई महत्वपूर्ण कार्य आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

अधीक्षक की भूमिका भी जांच के दायरे में आए

घटना के बाद अस्पताल अधीक्षक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। अधीक्षक पर लगाए जा रहे राजनीतिक हस्तक्षेप, प्रशासनिक अक्षमता और लंबे समय से एक ही पद पर बने रहने संबंधी आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले शासन स्तर पर रिकॉर्ड, नियुक्ति अवधि, प्रशासनिक निर्णय और अस्पताल की व्यवस्थाओं की जांच जरूरी है।

पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग

सवाल केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं हैं। प्रसव कक्ष में पुरुष कर्मचारियों की तैनाती, उनकी योग्यता एवं अधिकृत भूमिका, महिला डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता, आउटसोर्स व्यवस्था, मरीजों की सुरक्षा तथा अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही—इन सभी बिंदुओं की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि वीडियो में दिखाई गई स्थिति बेहद गंभीर मामला है। प्रसव पीड़ा से गुजर रही किसी भी महिला की गरिमा, निजता और सुरक्षा के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। जांच के बाद जो भी जिम्मेदार पाया जाए, उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

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