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| अवैध क्लीनिकों और कथित झोलाछाप डॉक्टरों की बढ़ती संख्या पर सवाल, विशेष अभियान चलाकर जांच की मांग |
रीवा/मऊगंज। रीवा संभाग के रीवा और मऊगंज जिलों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिनकी चिकित्सकीय योग्यता और पंजीयन की जांच जरूरी है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि दोनों जिलों में ऐसे कथित अवैध चिकित्सकों की संख्या हजारों तक पहुंच गई है। हालांकि इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जाता है कि पूर्व में जिला प्रशासन के निर्देश पर थाना क्षेत्रवार बिना वैध डिग्री चिकित्सा कार्य करने वालों की जानकारी जुटाने और उन्हें चिन्हित करने की कार्रवाई की गई थी। उस समय कई ऐसे लोगों के नाम सामने आने की बात कही गई थी, लेकिन आरोप है कि समय के साथ इस व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी कमजोर पड़ गई।
गांव-गांव खुल रहे क्लीनिक
स्थानीय लोगों के अनुसार खर्रा, भलुहा, नईगढ़ी, हिनौती, अगडाल, कटरा, लालगांव, चाकघाट, हनुमना और मऊगंज क्षेत्र में कई निजी क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। कुछ लोग मोटरसाइकिल से गांव-गांव जाकर उपचार और दवाएं देने का काम कर रहे हैं, जबकि कुछ ने बाकायदा क्लीनिक अथवा नर्सिंग होम खोल रखे हैं। सवाल यह है कि ऐसे स्थानों पर मरीजों को कौन-सी दवाएं दी जा रही हैं, उनका चिकित्सकीय परामर्श किस पंजीकृत डॉक्टर के आधार पर है और संबंधित प्रतिष्ठानों के पास आवश्यक अनुमति व पंजीयन है या नहीं?
दूसरे जिलों और राज्यों से भी आ रहे लोग
स्थानीय चर्चाओं में आरोप है कि दूसरे राज्यों और जिलों से आए कुछ लोग भी ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा व्यवसाय कर रहे हैं। कई स्थानों पर बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर उपचार की सेवाओं का प्रचार किया जा रहा है। ऐसे मामलों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दस्तावेजों, डिग्री और मेडिकल पंजीयन की जांच किया जाना आवश्यक है।
निजी अस्पतालों तक मरीज भेजने के आरोप
चाकघाट क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इलाकों में बड़े निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के प्रचार-प्रसार का भी उल्लेख किया जा रहा है। आरोप हैं कि गंभीर मरीजों को दूसरे शहरों के निजी अस्पतालों में भेजने की व्यवस्था में कुछ लोगों की भूमिका हो सकती है। हालांकि कमीशन तय होने जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
विशेष अभियान की मांग
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इन आरोपों को देखते हुए संभागीय प्रशासन, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से विशेष अभियान चलाने की मांग की जा रही है। अभियान में क्लीनिकों का सत्यापन, चिकित्सकीय डिग्री, मेडिकल पंजीयन, दवा बिक्री, नर्सिंग होम की अनुमति और उपचार करने वाले व्यक्तियों की योग्यता की जांच की जानी चाहिए। साथ ही पुलिस और पंचायत विभाग को भी अपने-अपने क्षेत्र में संचालित ऐसे प्रतिष्ठानों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग से साझा करनी चाहिए। मामला केवल अवैध चिकित्सा का नहीं, बल्कि ग्रामीण मरीजों की सुरक्षा और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर जनता के भरोसे का है। यदि बिना योग्यता इलाज करने वाले लोग वास्तव में सक्रिय हैं तो उन पर कार्रवाई जरूरी है और यदि आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होना भी उतना ही आवश्यक है। अब जरूरत ऐसी कार्रवाई की है जिसमें केवल कुछ छोटे क्लीनिकों पर औपचारिक कार्रवाई न हो, बल्कि पूरे नेटवर्क की जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि कौन वैध रूप से चिकित्सा सेवा दे रहा है और कौन नियमों को दरकिनार कर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है।
