| रक्षाबंधन से पहले बाजार में मिलावट का खतरा, मिठास के बीच स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है लापरवाही |
रीवा/मऊगंज। रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही रीवा और मऊगंज जिले के बाजारों में मिठाइयों की मांग बढ़ने लगी है। 28 अगस्त को मनाए जाने वाले रक्षाबंधन को लेकर लोग खरीदारी की तैयारियों में जुटे हैं। भाई-बहन के इस पवित्र त्योहार पर मिठाई का विशेष महत्व होता है, लेकिन बाजार में बढ़ती मांग के बीच मिलावटी खोवा, नकली दूध और घटिया सामग्री से तैयार मिठाइयों की आशंका भी चिंता बढ़ा रही है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता और जांच व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मिठास के नाम पर सेहत से खिलवाड़?
त्योहारों के दौरान मिठाइयों की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। अधिक मांग के बीच कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने की कोशिश में कुछ कारोबारी कथित तौर पर घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर सकते हैं। खोवा, दूध और मिठाइयों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी की जरूरत ऐसे समय में और बढ़ जाती है। मिलावट की स्थिति में इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए दूषित या खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थ अधिक परेशानी का कारण बन सकते हैं। इसलिए त्योहार के पहले बाजार में बिकने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है।
खुले में रखी मिठाइयों पर भी नजर जरूरी
बारिश के मौसम में सड़क किनारे और खुले स्थानों पर खाद्य सामग्री की बिक्री भी चिंता का विषय बनती है। धूल, धुआं, मक्खियों, गंदगी और कीचड़ के बीच रखी मिठाइयां स्वच्छता के लिहाज से सुरक्षित नहीं मानी जा सकतीं। सवाल यह है कि क्या खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा ऐसे स्थानों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है? क्या दुकानदार निर्धारित स्वच्छता मानकों का पालन कर रहे हैं? त्योहार के समय केवल कुछ दुकानों से नमूने लेने के बजाय व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाने की जरूरत है।
दूध-खोवा से लेकर मिठाई तक हो जांच
मिलावट का खतरा केवल मिठाइयों तक सीमित नहीं है। दूध, खोवा, घी, खाद्य तेल, मसाले और अन्य सामग्री की गुणवत्ता की भी जांच जरूरी है। त्योहारों के दौरान इनकी खपत बढ़ जाती है, इसलिए संदिग्ध खाद्य सामग्री की बिक्री पर प्रभावी निगरानी आवश्यक है। खाद्य सुरक्षा विभाग को बड़े स्तर पर मिठाई तैयार करने वाले प्रतिष्ठानों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित दुकानों पर भी नजर रखनी चाहिए। जहां संदेह हो, वहां नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच कराई जानी चाहिए।
सिर्फ नमूने नहीं, परिणाम भी दिखें
हर त्योहार से पहले खाद्य विभाग की जांच और नमूने लेने की कार्रवाई की खबरें सामने आती हैं। लेकिन जनता के लिए महत्वपूर्ण यह है कि इस कार्रवाई का असर बाजार में कितना दिखाई देता है। यदि कोई नमूना अमानक या मिलावटी पाया जाता है तो उसके बाद क्या कार्रवाई हुई, यह भी सार्वजनिक होना चाहिए। केवल आंकड़े जारी करने के बजाय दोषी कारोबारियों पर नियमानुसार कार्रवाई और संदिग्ध खाद्य सामग्री की बिक्री रोकना अधिक प्रभावी कदम होगा।
प्रशासन चलाए संयुक्त अभियान
रक्षाबंधन को देखते हुए रीवा और मऊगंज जिला प्रशासन को खाद्य सुरक्षा विभाग, पुलिस, नगरीय निकाय और पंचायत विभाग के साथ समन्वय कर विशेष अभियान चलाना चाहिए। मिठाई की दुकानों, दूध-खोवा विक्रेताओं, खुले में खाद्य सामग्री बेचने वाले स्थानों और बड़े निर्माण केंद्रों की जांच की जानी चाहिए। साथ ही उपभोक्ताओं से भी अपील की जानी चाहिए कि वे संदिग्ध गुणवत्ता वाली मिठाई या खाद्य सामग्री खरीदने से बचें और किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर संबंधित विभाग को शिकायत करें।
मुनाफे के साथ गुणवत्ता भी जरूरी
त्योहारों में खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के साथ कीमतों में वृद्धि भी होती है। ऐसे समय में प्रशासन को मनमानी कीमत वसूली और अनुचित मुनाफाखोरी पर भी नजर रखनी चाहिए। व्यापार करना अधिकार है, लेकिन उपभोक्ता के स्वास्थ्य से समझौता करके मुनाफा कमाना स्वीकार्य नहीं हो सकता। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व है। इस दिन परिवार में पहुंचने वाली मिठाई खुशी का कारण बने, बीमारी का नहीं—इसके लिए प्रशासन और खाद्य कारोबारियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। अब जरूरत है कि खाद्य सुरक्षा की जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे। बाजार से लेकर गांव की छोटी दुकानों तक वास्तविक निगरानी हो, मिलावट पाए जाने पर प्रभावी कार्रवाई हो और आम उपभोक्ता को सुरक्षित खाद्य पदार्थ मिलने का भरोसा कायम रहे।