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| प्रतिभाओं का सौदा या व्यवस्था की विफलता? रीवा-मऊगंज में शिक्षा और रोजगार व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल |
रीवा/मऊगंज - देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) को प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। लाखों छात्र-छात्राएं वर्षों तक कठिन परिश्रम कर इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने का सपना देखते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के रीवा संभाग, विशेषकर रीवा और मऊगंज जिलों में शिक्षा, रोजगार और व्यावसायिक डिग्रियों के नाम पर जिस प्रकार के आरोप और चर्चाएं सामने आ रही हैं, वे व्यवस्था की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती हैं। आज का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मेहनत और प्रतिभा ही सफलता का एकमात्र माध्यम रह गई है, या फिर राजनीतिक पहुंच, आर्थिक सामर्थ्य और प्रभावशाली संपर्कों ने प्रतिभाओं का स्थान लेना शुरू कर दिया है?
रीवा संभाग में लंबे समय से यह चर्चा आम है कि कुछ व्यावसायिक पाठ्यक्रमों, विशेषकर फार्मेसी से संबंधित डिग्रियों और लाइसेंसों के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खेल चल रहा है। रीवा मऊगंज में एसे दलाल सक्रीय है जो वेरोजगारो से डिगरी दिलाने के लिए लाखो लाख बसुलते है अज ओह दलाल लाखो के नहीं करोडो करोड़ के मालिक हो गए है स्थानीय स्तर पर ऐसे आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कुछ लोगों ने लाखों रुपये खर्च कर बिना नियमित अध्ययन किए डिग्रियां प्राप्त कीं और आज वे मेडिकल स्टोर सहित अन्य व्यवसायों का संचालन कर रहे हैं। यदि इन आरोपों में सत्यता है, तो यह केवल शैक्षणिक अनियमितता नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
विडंबना यह है कि जिन युवाओं ने वर्षों तक कठिन परिश्रम कर शिक्षा प्राप्त की, वे रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर कुछ लोग कथित रूप से आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव के दम पर आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। यह स्थिति मेहनती और योग्य विद्यार्थियों के मन में निराशा और असंतोष पैदा कर रही है।
सबसे बड़ा प्रश्न सरकार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है। यदि किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में संदिग्ध डिग्रियां, लाइसेंस अथवा शैक्षणिक अनियमितताओं की शिकायतें हैं, तो क्या उनकी निष्पक्ष जांच नहीं होनी चाहिए? क्या संबंधित विभाग समय-समय पर दस्तावेजों और योग्यता का परीक्षण नहीं कर सकते?
जनहित में यह सुझाव भी सामने आ रहा है कि जिन व्यक्तियों ने फार्मेसी अथवा अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के आधार पर लाइसेंस प्राप्त किए हैं, उनके शैक्षणिक अभिलेखों का सत्यापन किया जाए। यदि आवश्यक हो तो विशेषज्ञ समिति गठित कर उनकी शैक्षणिक योग्यता और व्यावसायिक दक्षता का परीक्षण कराया जाए। जबकि फार्मेसी की डिगरी के लिए अंग्रेजी बिषय अनिवार्य होती है इनकी टेस्ट लिया जा सकता है यह प्रक्रिया न केवल व्यवस्था में पारदर्शिता लाएगी, बल्कि योग्य और ईमानदार पेशेवरों के सम्मान की भी रक्षा करेगी।
यह विषय केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। समाज में तेजी से आर्थिक रूप से समृद्ध हुए कुछ लोगों की आय के स्रोतों को लेकर भी समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। आलीशान भवन, महंगी गाड़ियां और करोड़ों रुपये की संपत्ति रखने वाले व्यक्तियों के संबंध में यदि जनसामान्य के बीच प्रश्न उठ रहे हैं, तो संबंधित एजेंसियों का दायित्व है कि वे आवश्यक होने पर वैधानिक प्रक्रिया के तहत तथ्यों की जांच करें। लोकतंत्र में पारदर्शिता ही जनता के विश्वास का सबसे बड़ा आधार है।
युवाओं के बीच एक और चिंता लगातार बढ़ रही है—क्या आज प्रतिभा का मूल्यांकन केवल दो आधारों पर होने लगा है? पहला, राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच; दूसरा, आर्थिक सामर्थ्य। यदि किसी प्रतिभाशाली विद्यार्थी के पास इनमें से कोई भी साधन नहीं है, तो उसके सामने संघर्ष का रास्ता और अधिक कठिन हो जाता है।
रीवा संभाग ने अतीत में कई चर्चित भ्रष्टाचार मामलों को देखा है। शिक्षा से जुड़े घोटालों ने हमेशा समाज को झकझोरा है। लेकिन आज जिस प्रकार प्रतियोगी परीक्षाओं, डिग्रियों, लाइसेंसों और रोजगार की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वे भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी हैं। यदि व्यवस्था समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाती, तो युवाओं का शिक्षा व्यवस्था से विश्वास डगमगा सकता है।
देश का युवा आज भी कलम की ताकत पर विश्वास करता है। वह रात-दिन मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है, लेकिन जब उसे यह महसूस होने लगे कि प्रतिभा का सम्मान नहीं हो रहा है, तो उसके मन में व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा होना स्वाभाविक है।
आने वाला समय यह तय करेगा कि देश और प्रदेश अपने युवाओं को क्या संदेश देना चाहते हैं—क्या सफलता का मार्ग केवल परिश्रम और प्रतिभा होगा, या फिर प्रभाव, पैसे और पहुंच का वर्चस्व कायम रहेगा? सरकार, प्रशासन और जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी प्रतिभाशाली युवा का भविष्य बिचौलियों, भ्रष्टाचार और अपारदर्शी व्यवस्थाओं की भेंट न चढ़े। प्रतिभा को संरक्षण मिलेगा, तभी राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित होगा।
