| शहडोल में भूमाफिया का जलवा बरकरार! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल |
शहडोल - जिले के चर्चित बड़ी भीट क्षेत्र में एक बार फिर भूमि विवाद और कथित अवैध प्लाटिंग का मामला सुर्खियों में है। सूत्रों के अनुसार खसरा नंबर 2134 की जमीन पर मोतीलाल पटेल द्वारा प्लाटिंग कर भूखंडों की बिक्री की गई, लेकिन अब इस पूरे मामले पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस जमीन की प्लाटिंग कर बेची गई, वहां न तो वैधानिक रूप से स्वीकृत सड़क है और न ही संबंधित विभागों की आवश्यक अनुमति होने की जानकारी सामने आई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों ने प्लॉट खरीदे हैं, उनके आने-जाने का रास्ता आखिर कहां से होगा?
सूत्रों का दावा है कि अब रास्ता निकालने के लिए खसरा नंबर 39 की जमीन, जो हामिद अली के नाम दर्ज बताई जा रही है, पर सड़क बनाने की तैयारी की जा रही है। आरोप है कि जब हामिद अली ने अपनी जमीन से रास्ता देने से इनकार किया तो उनके खिलाफ कथित रूप से झूठी शिकायतें और भ्रामक प्रकाशन करवाने का प्रयास किया गया। मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आ रही है। समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय और गरीबों की मदद के लिए पहचाने जाने वाले अभिषेक सोनी का नाम भी विवाद में घसीटा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस व्यक्ति का इस भूमि विवाद से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, उसका नाम उछालकर माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों की मानें तो कथित रूप से 6 लाख रुपये के लेन-देन की चर्चाएं भी क्षेत्र में जोरों पर हैं। आरोप यह भी है कि बिना आवश्यक अनुमतियों के सड़क का निर्माण कर दिया गया, बिजली के खंभे लगा दिए गए और सिविल लाइन क्षेत्र में खुदाई तक कर दी गई। हैरानी की बात यह है कि संबंधित विभागों की अनुमति का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। अब सबसे बड़ा सवाल राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। क्या प्रशासन को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है, या फिर किसी राजनीतिक दबाव अथवा प्रभाव के चलते कार्रवाई नहीं हो रही? क्या एक गरीब व्यक्ति की जमीन पर कथित कब्जे की कोशिश को नजरअंदाज किया जा रहा है?
क्षेत्र में चर्चा है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह मामला बड़े विवाद का रूप ले सकता है। जनता जानना चाहती है कि आखिर कानून का राज चलेगा या फिर प्रभावशाली लोगों की मनमानी? क्या मोतीलाल पटेल पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या फिर सच एक बार फिर दबा दिया जाएगा?