| विंध्य की खेती में बड़ा बदलाव: रीवा में अब गर्मी में भी लहलहा रही धान की फसल, छत्तीसगढ़ की तर्ज पर किसानों ने रचा नया इतिहास |
रीवा - विंध्य अंचल के रीवा संभाग में कृषि के क्षेत्र में एक बड़ा और अनूठा बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी सब्जियों और प्याज के सीमित उत्पादन के लिए जाने जाने वाला यह क्षेत्र अब छत्तीसगढ़ के किसानों की तर्ज पर गर्मी (जायद) के मौसम में भी धान की सफल खेती कर नया कीर्तिमान रच रहा है।
वर्ष 1986 से 2000 तक रीवा जिले में हरी सब्जियों का उत्पादन काफी कम था और अधिकांश जरूरतें उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से पूरी होती थीं। उस समय यहां मुख्य रूप से प्याज की खेती होती थी। लेकिन वर्ष 2000 के बाद स्थिति बदली और रीवा टमाटर, करेला, लौकी, कद्दू, बरबटी और शिमला मिर्च जैसी हरी सब्जियां अन्य राज्यों में भेजने लगा। अब इसी नवाचारी सोच के साथ किसानों ने गर्मी में भी धान उगाना शुरू कर दिया है।
किसानों के सफल प्रयोग से मिली प्रेरणा
2024-25 की शुरुआत: सेधहा ग्राम पंचायत (थाना गढ़, विकासखंड गंगेव) के किसान ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह 'बाबा' ने गदही क्षेत्र में लगभग 70 डिसमिल जमीन पर गर्मी की धान बोई थी, जिससे उन्हें 20 से 25 बोरी की बेहतरीन पैदावार हासिल हुई।
2026 में बढ़ा दायरा: इस प्रयोग से प्रेरित होकर 20 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत कैथा (तहसील मनगवां) के कृषक उग्रभान पटेल पिता रामानंद पटेल ने करीब 50 डिसमिल खेत में और ग्राम भौकरी कला के किसान अज्ञाभान विश्वकर्मा ने लगभग 1 एकड़ में धान की फसल बोई है, जो वर्तमान में बेहद अच्छी स्थिति में है।
प्रशासन और कृषि अधिकारियों ने की पुष्टि
तहसील मनगवां वृत्त गढ़ के नायब तहसीलदार अजय मिश्रा और कृषि विभाग के एसडीओ रवि सिंह ने रीवा में गर्मी के मौसम में हो रही इस धान की खेती की आधिकारिक पुष्टि की है। गंगेव ब्लॉक के वरिष्ठ विकास अधिकारी एस.एस. सरल ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान बताया कि किसानों ने छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों से यह तकनीक सीखकर जागरूकता दिखाई है।
जिन खेतों के आसपास पहले केवल उड़द, मूंग या हरी भिंडी लगाई जाती थी, वहां अब किसान बोरवेल के पानी के सहारे सफलतापूर्वक धान उगा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभूतपूर्व उत्पादन से क्षेत्र के अन्य किसानों का भी उत्साह बढ़ेगा और रीवा में बहुफसली खेती को नया आयाम मिलेगा।