शहडोल क्रिश्चियन अस्पताल जमीन विवाद: 40 लाख हड़पकर सड़क पर लाने की साजिश

शहडोल क्रिश्चियन अस्पताल जमीन विवाद: 40 लाख हड़पकर सड़क पर लाने की साजिश

शहडोल - क्रिश्चियन अस्पताल शहडोल और उससे जुड़ी लगभग 3 एकड़ भूमि को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है।अस्पताल के  संरक्षक प्रयास कुमार प्रकाश ने आरोप लगाया है कि मद्रास स्थित संस्था मिशनरी सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (NMSI) के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों ने उनके साथ सुनियोजित धोखाधड़ी कर लगभग 40 लाख रुपये हड़प लिए और बाद में उन्हें उनके अधिकारों से बेदखल कर दिया। प्रयास कुमार प्रकाश ने पूर्व में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक शहडोल रेंज को सौंपे गए विस्तृत शिकायत पत्र में आरोप लगाया था कि संस्था के तत्कालीन सचिव सुरेश राजन डी और वर्तमान सचिव क्रिस्टोफर विजयन ने उन्हें अस्पताल के संरक्षण और संचालन के नाम पर लाखों रुपए निवेश कराने के बाद किनारे कर दिया। शिकायत के अनुसार अस्पताल की भूमि और संपत्तियों को लेकर पर्दे के पीछे करोड़ों रुपये के सौदों की साजिश रची गई और पीड़ित द्वारा खर्च की गई राशि लौटाने के बजाय उन्हें ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

जाली हस्ताक्षर से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

शिकायत में दावा किया गया है कि वर्ष 2012 में उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर एक सहमति पत्र नोटराइज कराया गया, जिसके आधार पर अस्पताल और उससे जुड़ी जमीन को अन्य लोगों के नाम लीज पर दिलाने की कोशिश हुई। बाद में यही मामला न्यायालय तक पहुंचा और कई दस्तावेजों की वैधता पर सवाल खड़े हुए। प्रयास कुमार प्रकाश का आरोप है कि उन्होंने अस्पताल को बचाने, भूमि वापस संस्था के नाम दर्ज कराने और अस्पताल संचालन के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन जब निवेश की गई राशि और अधिकारों की बात आई तो संस्था के पदाधिकारियों ने कथित रूप से उन्हें धोखा दे दिया।

करोड़ों खर्च किए, बदले में मिला कर्ज और बर्बादी"

शिकायतकर्ता के अनुसार अस्पताल के संचालन, भवन निर्माण, मशीनरी खरीद और न्यायालयीन मामलों में उन्होंने भारी आर्थिक निवेश किया। इसके लिए उन्हें अपनी पैतृक संपत्ति बेचनी पड़ी, पत्नी के गहने गिरवी रखने पड़े और बाजार से कर्ज लेना पड़ा। आज स्थिति यह है कि उन पर एक करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बकाया है और परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है। जान से मारने की धमकी का भी आरोप शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो उन्हें जान से मरवा देने की धमकी दी गई। पीड़ित ने पूर्व एडीजीपी से न्याय की मांग भी की थी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक न्यास भंग, आपराधिक षड्यंत्र और धमकी सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए।

पर सवाल उठता है कि 

यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही हैं तो आखिर 40 लाख रुपये किस आधार पर लिए गए.? अस्पताल की भूमि और प्रबंधन को लेकर पर्दे के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय रहे? और वर्षों से चल रहे इस विवाद में अब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? शहडोल में चर्चित क्रिश्चियन अस्पताल विवाद अब केवल जमीन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह करोड़ों रुपये के लेन-देन, कथित फर्जीवाड़े और संस्थागत जवाबदेही का बड़ा प्रश्न बनता जा रहा है। अब निगाहें एडीजीपी कार्यालय पर टिकी हैं कि पूर्व में शिकायत के बाद की कार्यवाही नहीं हुई, अब क्या वर्तमान एडीजीपी मामले को संज्ञान लेंगे या फिर मामला सिर्फ फाइलों तक सीमित रह जाएगा।

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