दुर्ग; AIIMS में नौकरी का सपना दिखाकर 14.50 लाख डकार गया दोस्त… लखनऊ से ऐसे चढ़ा पुलिस के हत्थे Aajtak24 News

दुर्ग; AIIMS में नौकरी का सपना दिखाकर 14.50 लाख डकार गया दोस्त… लखनऊ से ऐसे चढ़ा पुलिस के हत्थे Aajtak24 News

दुर्ग - रायपुर एम्स में नौकरी लगवाने का झांसा देकर 14 लाख 50 हजार रुपए की ठगी करने वाले आरोपी को दुर्ग पुलिस ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन साइबर तकनीकी विश्लेषण के जरिए आखिरकार पुलिस उसकी लोकेशन तक पहुंच गई। मामला थाना वैशाली नगर क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, वृंदा नगर कैम्प-1 भिलाई निवासी मुकेश कोसरे ने 13 जनवरी 2026 को थाना वैशाली नगर में शिकायत दर्ज कराई थी। प्रार्थी ने पुलिस को बताया कि उसका कॉलेज मित्र अभिषेक जयसवाल खुद को बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों से जुड़ा हुआ बताता था। आरोपी ने रायपुर एम्स में स्टाफ नर्स की नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया और ज्वाइनिंग लेटर देने का आश्वासन दिया।

नौकरी पाने की उम्मीद में प्रार्थी आरोपी के झांसे में आ गया। सितंबर 2021 से अक्टूबर 2022 के बीच उसने अपने एसबीआई खाते से अलग-अलग किश्तों में कुल 14 लाख 50 हजार रुपए आरोपी को दे दिए। रकम लेने के बाद आरोपी लगातार ज्वाइनिंग लेटर देने और पैसे लौटाने के नाम पर टालमटोल करता रहा। बाद में वह अपने निवास स्थान से फरार हो गया। शिकायत के आधार पर थाना वैशाली नगर में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने साइबर सेल भिलाई की मदद से आरोपी के मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल गतिविधियों का तकनीकी विश्लेषण किया। जांच के दौरान आरोपी की लोकेशन उत्तर प्रदेश के लखनऊ में मिली।

इसके बाद पुलिस टीम को तत्काल लखनऊ रवाना किया गया, जहां घेराबंदी कर आरोपी अभिषेक जयसवाल को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस ने मामले से संबंधित दस्तावेज और तकनीकी साक्ष्य भी जब्त किए हैं। दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति को बिना सत्यापन के पैसे न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब आरोपी 2021 से 2022 के बीच इतनी बड़ी रकम ले रहा था, तो शिकायत दर्ज होने में लगभग चार साल का समय क्यों लगा, क्या पीड़ितों में पुलिस प्रक्रिया को लेकर भरोसे की कमी है?
  2. क्या पुलिस यह जांच कर रही है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क और फर्जी भर्ती गिरोह भी सक्रिय है?
  3. नौकरी के नाम पर बढ़ती ऑनलाइन और व्यक्तिगत ठगी की घटनाओं के बावजूद क्या प्रशासन और सरकारी संस्थानों द्वारा युवाओं को जागरूक करने के लिए पर्याप्त अभियान चलाए जा रहे हैं?

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