जांजगीर-चांपा; देनदारों से बचने रची चोरी की साजिश, बिर्रा पुलिस ने कुछ घंटों में किया खुलासा Aajtak24 News

जांजगीर-चांपा; देनदारों से बचने रची चोरी की साजिश, बिर्रा पुलिस ने कुछ घंटों में किया खुलासा Aajtak24 News

जांजगीर-चांपा - दो लाख इक्कीस हजार रुपए की कथित चोरी का मामला उस समय पूरी तरह पलट गया, जब बिर्रा पुलिस की जांच में सामने आया कि चोरी हुई ही नहीं थी, बल्कि कर्ज चुकाने से बचने के लिए आवेदक ने खुद ही झूठी कहानी गढ़ी थी। पुलिस ने महज कुछ घंटों में पूरे मामले का पर्दाफाश कर आवेदक की साजिश नाकाम कर दी। मामला थाना बिर्रा क्षेत्र के ग्राम बनडभरा का है। जानकारी के अनुसार, नरेश भारद्वाज ने 9 मई को थाना पहुंचकर लिखित आवेदन दिया था कि उसने एक दिन पहले अपनी खेत जमीन को लीला बाई कश्यप को बेचकर 2 लाख 21 हजार रुपए प्राप्त किए थे। उसने पुलिस को बताया कि रकम घर की अलमारी में रखी थी और रात में जब वह आंगन में सो रहा था, तब अज्ञात चोर अलमारी को घर से बाहर ले जाकर उसमें रखी नकदी चोरी कर ले गए।

आवेदन मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया, लेकिन शुरुआती जांच में ही कई बातें संदिग्ध नजर आने लगीं। आवेदन देने के बाद आवेदक का अचानक घर चले जाना और फोन पर थाना आने से बचना पुलिस के शक को और गहरा कर गया। वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी दिए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक श्रीमती निवेदिता पाल के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री उमेश कश्यप के मार्गदर्शन में बिर्रा पुलिस तत्काल सक्रिय हुई। उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती सतरूपा तारम के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आवेदक व उसके परिजनों से गहन पूछताछ शुरू की।

पुलिस की सख्त और मनोवैज्ञानिक पूछताछ के आगे आखिरकार आवेदक टूट गया। उसने स्वीकार किया कि गांव के कुछ लोगों से उसने उधार लिया था और कर्ज चुकाने से बचने के लिए चोरी की झूठी कहानी रची थी। उसने खुद ही अलमारी को घर से दूर क्षतिग्रस्त हालत में फेंका और पूरी रकम घर की छत में छिपा दी थी। आवेदक की निशानदेही पर पुलिस ने छिपाई गई पूरी रकम बरामद कर ली। गवाहों और परिजनों की मौजूदगी में 2 लाख 21 हजार रुपए आवेदक को सुपुर्द किए गए।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि मामले की गंभीरता से जांच नहीं की जाती, तो यह झूठी शिकायत निर्दोष लोगों को परेशानी में डाल सकती थी। पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से मामले का जल्द खुलासा हो सका। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी जय कुमार साहू, सहायक उप निरीक्षक टी.आर. जांगड़े, नरेंद्र शुक्ला, आरक्षक रघुवीर यादव, जनक कश्यप, दीपक तिवारी और महिला आरक्षक रितु लहरे की विशेष भूमिका रही।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि पुलिस शुरुआती जांच में सतर्कता नहीं दिखाती, तो क्या निर्दोष लोगों पर चोरी का मामला दर्ज हो सकता था, और ऐसे झूठे मामलों को रोकने के लिए क्या स्थायी व्यवस्था है?
  2. क्या झूठी चोरी की शिकायत देकर पुलिस संसाधनों और प्रशासनिक समय का दुरुपयोग करने वाले आवेदक पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, या मामला केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा?
  3. आर्थिक दबाव और कर्ज के कारण व्यक्ति द्वारा इस तरह की साजिश रचने की घटना क्या ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते आर्थिक संकट और सामाजिक दबाव की ओर संकेत नहीं करती?

Post a Comment

Previous Post Next Post