![]() |
| बालाघाट ; काम नहीं तो नोटिस तय! बालाघाट में कलेक्टर की सख्ती Aajtak24 News |
बालाघाट - जिले के किरनापुर और लांजी विकासखंड में आयोजित समीक्षा बैठकों में कलेक्टर मृणाल मीना ने सरकारी योजनाओं की धीमी प्रगति पर सख्त नाराजगी जताई। बैठक में कम प्रदर्शन वाले कर्मचारियों को नोटिस जारी करने और एक सप्ताह के भीतर सुधार लाने के निर्देश दिए गए। जनपद पंचायत सभागार में आयोजित बैठकों में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ, अपर कलेक्टर जी.एस. धुर्वे, डी.पी. बर्मन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। लांजी बैठक में विधायक राजकुमार कर्राहे ने भी अधिकारियों को जनता के साथ संवेदनशील व्यवहार रखने और विकास कार्य समय पर पूरा करने की हिदायत दी।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने एएनएम और सीएचओ कर्मचारियों की उपस्थिति “सार्थक एप” के जरिए दर्ज करने और उसी आधार पर वेतन भुगतान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को अपने कार्यस्थल से ही लॉग-इन और लॉग-आउट करना होगा ताकि वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित हो सके। गर्भवती महिलाओं के एएनसी पंजीयन और जांच की समीक्षा के दौरान कई क्षेत्रों में प्रगति बेहद कम पाई गई। इस पर किरनापुर और लांजी विकासखंड के कई एएनएम और सीएचओ को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में सुधार के निर्देश दिए गए।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की समीक्षा में भी कुपोषित बच्चों के चिन्हांकन और 3 से 6 वर्ष के बच्चों के पंजीयन में कमजोर प्रदर्शन सामने आया। कम प्रगति वाली कार्यकर्ताओं को सात दिन के भीतर सुधार करने के निर्देश दिए गए। साथ ही गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए दवा और फूड बास्केट वितरण सुनिश्चित करने को कहा गया। राजस्व विभाग की समीक्षा में फार्मर रजिस्ट्री और किसान आईडी बनाने की धीमी गति पर कई पटवारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि एक सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत किसानों की फार्मर आईडी बनाई जाए। इसके अलावा खसरा बंटांकन, नक्शा तरमीम और नामांतरण प्रकरणों का समयसीमा में निराकरण करने पर भी जोर दिया गया।
उद्यानिकी विभाग की समीक्षा के दौरान अमेड़ा नर्सरी में मखाना खेती को बढ़ावा देने में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी की एक वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश दिए गए। वहीं धान कटाई करने वाले हार्वेस्टरों में फसल अवशेष रोकने वाले अटैचमेंट अनिवार्य करने और बिना अटैचमेंट वाले हार्वेस्टरों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। बैठक में नल-जल योजनाओं और बिजली आपूर्ति की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि एएनसी पंजीयन, कुपोषण और फार्मर आईडी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में प्रगति इतनी खराब है, तो क्या प्रशासन मानता है कि जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग पहले से कमजोर रही है?
- कर्मचारियों की उपस्थिति “सार्थक एप” से दर्ज कराने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या विभागों को पहले से फील्ड कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति पर भरोसा नहीं था?
- हर समीक्षा बैठक में नोटिस और कार्रवाई की बात होती है, लेकिन क्या प्रशासन यह बताएगा कि पिछले एक वर्ष में खराब प्रदर्शन करने वाले कितने कर्मचारियों पर वास्तविक अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई?
