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| सतना; 2047 के विकसित भारत की रीढ़ बनेंगी महिलाएं! सतना में मंच से बड़ा दावा Aajtak24 News |
सतना - सतना के टाउन हॉल में आयोजित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं के स्वर्ण जयंती समारोह में महिलाओं की भूमिका और महिला सशक्तिकरण को लेकर बड़े दावे किए गए। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में महिलाओं की अहम भूमिका होगी। मदर्स डे के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में सांसद गणेश सिंह ने अध्यक्षता की। समारोह में महापौर योगेश ताम्रकार, पूर्व महापौर ममता पाण्डेय, प्रांतीय अध्यक्ष रामेश्वरी नेताम और प्रदेश महासचिव अंजू सिंह बघेल सहित बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं मौजूद रहीं।
अपने संबोधन में केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं से महिलाएं अब हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मातृवंदन योजना, मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना और मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में कार्यरत महिलाएं शासन की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं और समाज में जागरूकता बढ़ाने में उनकी बड़ी भूमिका है।
सांसद गणेश सिंह ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं बच्चों के पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य और समाज के सर्वांगीण विकास में अहम योगदान दे रही हैं। उन्होंने इन्हें समाज की “आधारशिला” बताते हुए कहा कि इन्हीं के प्रयासों से योजनाएं जमीनी स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंच पाती हैं।
महापौर योगेश ताम्रकार ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल सम्मान समारोह नहीं बल्कि समाज की नींव मजबूत करने वाली महिलाओं के त्याग और समर्पण को नमन करने का अवसर है। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती और महात्मा गांधी के चित्र पर दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुई। समापन अवसर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ द्वारा अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- महिला सशक्तिकरण और विकसित भारत की बात हो रही है, लेकिन क्या सरकार यह बताएगी कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अब तक नियमित कर्मचारी का दर्जा और पर्याप्त मानदेय क्यों नहीं मिल पाया?
- सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का दावा कर रही है, तो फिर ग्रामीण क्षेत्रों में महिला पोषण, एनीमिया और बाल कुपोषण के आंकड़े अब भी चिंताजनक क्यों हैं?
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को योजनाओं की रीढ़ बताया जाता है, लेकिन क्या उनके कार्यभार, संसाधनों और सुरक्षा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस नीति बनाई गई है?
