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| मंदसौर में कलेक्टर का सख्त अल्टीमेटम… खराब मिली फायर ब्रिगेड या एंबुलेंस तो तय होगी जवाबदेही! Aajtak24 News |
मंदसौर - जिले में बढ़ती गर्मी, संभावित आगजनी की घटनाओं और पेयजल संकट को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग ने सभी नगरीय निकायों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और अन्य जरूरी वाहनों को पूरी तरह दुरुस्त स्थिति में रखा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। सुशासन भवन स्थित सभागार में आयोजित साप्ताहिक अंतर विभागीय समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने विभिन्न विभागों की योजनाओं और कार्यों की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। बैठक में अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
कलेक्टर ने कहा कि ग्रीष्मकाल के दौरान पेयजल व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सभी सीएमओ को निर्देश दिए कि जहां भी पानी की समस्या सामने आए, उसका तत्काल समाधान किया जाए। साथ ही जल स्रोतों की नियमित जांच कर पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और पानी चोरी की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में गेहूं उपार्जन कार्य की समीक्षा करते हुए बारदानों की उपलब्धता, किसानों के भुगतान और मंडी दरों की स्थिति की जानकारी ली गई। कलेक्टर ने नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित फील्ड भ्रमण कर उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करें और किसानों को भुगतान में किसी प्रकार की देरी न होने दें।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को नई जल संरचनाओं की पहचान कर निर्माण कार्य जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए। वहीं “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत किए जा रहे कार्यों की समय पर ऑनलाइन एंट्री सुनिश्चित करने को भी कहा गया। बैठक में संबल अनुग्रह सहायता, संबल पंजीयन और भूमि आवंटन से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग को फायर एनओसी से संबंधित लंबित कार्यवाही शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने सभी नगरीय निकायों को निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने और समयसीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- क्या जिले के सभी नगरीय निकायों में फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस पहले से ही खराब या संसाधनों की कमी से जूझ रहे थे, जिसके बाद यह सख्त निर्देश जारी करने पड़े?
- हर साल गर्मियों में पेयजल संकट और पानी चोरी की शिकायतें सामने आती हैं, फिर भी स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं बन पाया?
- क्या उपार्जन केंद्रों पर किसानों को भुगतान और व्यवस्थाओं में होने वाली देरी के लिए किसी अधिकारी की जवाबदेही तय की गई है, या समीक्षा बैठकें केवल औपचारिकता बनकर रह जाती हैं?
