नीमच में खेती का बड़ा ‘मास्टर प्लान’… संतरे से कमाई, फूड प्रोसेसिंग से गांव-गांव रोजगार की तैयारी Aajtak24 News

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नीमच - जिले में कृषि और उद्यानिकी आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने इस वर्ष बड़ा लक्ष्य तय किया है। कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिले में संतरा फलोद्यान का रकबा 1500 हेक्टेयर तक बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही हर पंचायत में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के तहत कम से कम एक खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित कराने के प्रयास किए जाएं। ये निर्देश कलेक्टर ने एपीसी समूह की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें उद्यानिकी और प्रसंस्करण आधारित कृषि मॉडल की ओर ले जाना जरूरी है।

बैठक में कलेक्टर ने कृषि विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वे किसानों से लगातार संवाद करें और उन्हें आधुनिक खेती, मिट्टी परीक्षण तथा फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित करें। उन्होंने जिले में 10 हजार से अधिक किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर सॉइल हेल्थ कार्ड तैयार करने का अभियान चलाने को कहा।कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों को उर्वरक वितरण अब ई-विकास पोर्टल और ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से ही किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पिछले वर्ष अधिक मात्रा में खाद उपयोग करने वाले किसानों से संपर्क कर उन्हें मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए जागरूक किया जाए।

बैठक में किसानों को सोयाबीन के बजाय मक्का और मूंगफली जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि बाजार और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलों की जानकारी और आवश्यक बीज उपलब्ध कराए जाएं, जिनसे उन्हें अधिक लाभ मिल सके। समीक्षा बैठक में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, डेयरी और अन्य विभागों की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री अमन वैष्णव, प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉ. सी.पी. पचोरी, सहायक आयुक्त सहकारिता श्री राजू डाबर, उप संचालक कृषि श्री दिनेश मंडलोई, उप संचालक पशुपालन डॉ. राजेश पाटीदार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या संतरा फलोद्यान का 1500 हेक्टेयर विस्तार लक्ष्य जमीनी जल उपलब्धता और किसानों की आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखकर तय किया गया है, या यह केवल कागजी लक्ष्य है?
  2. हर पंचायत में PMFME यूनिट स्थापित करने की योजना के लिए क्या पर्याप्त निवेश, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध है, या ये इकाइयां शुरू होकर बंद होने का खतरा झेलेंगी?
  3. किसानों को सोयाबीन छोड़कर दूसरी फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है, लेकिन यदि बाजार में उचित समर्थन मूल्य और खरीदी व्यवस्था नहीं मिली तो नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?

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