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| सीधी; प्यासे परिंदों के लिए आगे आया शहर! ‘हर सकोरा बना जीवन का सहारा Aajtak24 News |
सीधी - भीषण गर्मी में जब इंसान ही नहीं बल्कि पक्षी भी पानी की एक-एक बूंद के लिए भटक रहे हैं, ऐसे समय में सीधी जिले में शुरू किया गया “महावीर अभियान” संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनकर सामने आया है। “हर सकोरा बना जीवन का सहारा” थीम के तहत शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर पक्षियों के लिए पानी से भरे सकोरे रखे गए। यह अभियान केवल पक्षियों को पानी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को जीव दया, पर्यावरण संरक्षण और सह-अस्तित्व का संदेश देने का माध्यम भी बना। कलेक्ट्रेट परिसर, जिला न्यायालय, पूजा पार्क, मेघदूत पार्क, बस स्टैंड और शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-1 सहित कई स्थानों पर सकोरे स्थापित किए गए।
कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर विकास मिश्रा ने कहा कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील होना भारतीय संस्कृति की पहचान है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों, छतों और आसपास भी पक्षियों के लिए पानी और दाना रखने की आदत विकसित करें। इस अवसर पर सोनू जैन और अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बृजेन्द्र सिंह ने भी अभियान की सराहना करते हुए इसे सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बताया।
अभियान की सबसे खास बात एनसीसी, स्काउट और एनएसएस के विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ विभिन्न स्थानों पर सकोरे लगाए और आम लोगों को भी पक्षियों के संरक्षण के लिए जागरूक किया। भीषण गर्मी में जल स्रोत सूखने के कारण पक्षियों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह पहल न सिर्फ पक्षियों के लिए राहत बन रही है बल्कि समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दे रही है। प्रशासन का मानना है कि यदि लोग व्यक्तिगत स्तर पर भी ऐसे छोटे प्रयास करें तो यह अभियान बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- पक्षियों के संरक्षण के लिए सकोरे रखने की पहल सराहनीय है, लेकिन क्या जिले में सूखते जलस्रोतों और घटते हरित क्षेत्र को बचाने के लिए कोई स्थायी कार्ययोजना भी तैयार की गई है?
- हर साल गर्मियों में इस तरह के अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन क्या प्रशासन ने पक्षियों और वन्यजीवों के लिए दीर्घकालिक जल संरक्षण व्यवस्था पर कोई ठोस कदम उठाया है?
- यदि पर्यावरण संरक्षण प्राथमिकता है, तो क्या शहर में बढ़ते कंक्रीटीकरण और पेड़ों की कटाई पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कोई विशेष अभियान चलाया जा रहा है?
