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| छतरपुर; लोक अदालत ने बचाए टूटते रिश्ते! कोर्ट में फूलमाला पहन फिर साथ लौटे पति-पत्नी Aajtak24 News |
छतरपुर - छतरपुर में आयोजित नेशनल लोक अदालत केवल कानूनी मामलों के निपटारे तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई टूटते परिवारों को दोबारा जोड़ने का माध्यम भी बनी। आपसी समझौते और सुलह की भावना के साथ आयोजित इस लोक अदालत में लंबित और प्रीलिटिगेशन मिलाकर 1900 से अधिक मामलों का निराकरण किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में जिला न्यायालय छतरपुर और तहसील न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण छतरपुर के अध्यक्ष रविन्द्र सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर किया।
लोक अदालत के सफल संचालन के लिए जिला एवं तहसील न्यायालयों में कुल 31 खंडपीठों का गठन किया गया। इन पीठों ने आपसी सुलह-समझौते के आधार पर विभिन्न मामलों का निपटारा किया। आयोजित लोक अदालत में 686 लंबित प्रकरणों का निराकरण हुआ, जिनमें आपराधिक, चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना दावा, विद्युत और वैवाहिक विवाद जैसे मामले शामिल रहे। इन मामलों में कुल 4 करोड़ 93 लाख 80 हजार 134 रुपये के अवार्ड पारित किए गए। इसके अलावा 1215 प्रीलिटिगेशन मामलों का भी समाधान किया गया। इनमें बैंक, बिजली बिल, वाटर बिल और अन्य विवाद शामिल थे, जिनमें 1 करोड़ 31 लाख 20 हजार 648 रुपये के अवार्ड पारित हुए।
लोक अदालत का सबसे भावनात्मक पहलू पारिवारिक विवादों का समाधान रहा। ग्राम नारायणपुरा निवासी भैयालाल अनुरागी और रामरति अनुरागी के बीच दो वर्षों से चल रहा वैवाहिक विवाद आपसी समझाइश से खत्म हुआ और दोनों ने फिर साथ रहने का निर्णय लिया। इसी तरह महाराजपुर निवासी कमलेश और रामबाई के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद का भी समाधान हुआ। समझौते के बाद पति-पत्नियों ने एक-दूसरे को फूलमाला पहनाई और न्याय एवं नए जीवन की शुरुआत के प्रतीक के रूप में पौधे भेंट किए। अदालत परिसर में यह दृश्य लोगों के लिए भावुक और प्रेरणादायक बन गया।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- लोक अदालत में बड़ी संख्या में मामलों का निराकरण हुआ, लेकिन क्या इनमें से सभी समझौते वास्तव में स्वेच्छा से हुए या पक्षकारों पर जल्दी निपटारे का दबाव भी था?
- वैवाहिक विवादों में समझौता कराकर परिवार जोड़ने की बात हो रही है, लेकिन क्या बाद में इन मामलों की काउंसलिंग और फॉलोअप व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाती है?
- करोड़ों रुपये के अवार्ड पारित हुए, तो क्या प्रशासन और न्यायिक तंत्र यह बताएगा कि इन अवार्डों का वास्तविक भुगतान और पालन समय पर सुनिश्चित कैसे किया जाएगा?
