पन्ना; अब खाद के लिए नहीं लगेगी लंबी लाइन… मोबाइल से टोकन बनाओ और सीधे उर्वरक उठाओ Aajtak24 News

पन्ना; अब खाद के लिए नहीं लगेगी लंबी लाइन… मोबाइल से टोकन बनाओ और सीधे उर्वरक उठाओ Aajtak24 News

पन्ना - किसानों को खाद वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा देने के उद्देश्य से अब जिले में ई-विकास पोर्टल के जरिए उर्वरक वितरण व्यवस्था लागू की जा रही है। नई प्रणाली के तहत किसान स्वयं ऑनलाइन टोकन जनरेट कर अपनी सुविधानुसार निर्धारित केंद्र से खाद प्राप्त कर सकेंगे। कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत लागू की जा रही इस व्यवस्था की जानकारी देने के लिए सोमवार को कलेक्टर कार्यालय सभागार में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें पंजीकृत उर्वरक विक्रेताओं और संबंधित अधिकारियों को नई प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यशाला में बताया गया कि अब किसानों को खाद लेने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने की जरूरत नहीं होगी। किसान एमपी कृषि पोर्टल पर लॉगिन कर आधार और खसरा-खतौनी की जानकारी दर्ज कर ई-टोकन जनरेट कर सकेंगे। इसके बाद 48 घंटे के स्लॉट के भीतर वे अपने नजदीकी वितरण केंद्र से खाद प्राप्त कर पाएंगे। नई व्यवस्था के तहत किसानों को उनके रकबे के अनुसार अनुशंसित उर्वरक की मात्रा की जानकारी भी उपलब्ध होगी। प्रशासन का दावा है कि इससे जरूरत के अनुसार उर्वरक वितरण सुनिश्चित होगा और एक बार में ही किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध कराई जा सकेगी।

उप संचालक कृषि ओ.पी. तिवारी ने कहा कि ई-विकास प्रणाली से प्रत्येक किसान तक समय पर और पारदर्शी तरीके से उर्वरक पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस डिजिटल व्यवस्था से कालाबाजारी पर रोक लगाने और वितरण प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने में सहायता मिलेगी। कार्यशाला में मौजूद किसानों और विक्रेताओं के सवालों का समाधान भी किया गया। अधिकारियों ने पोर्टल के उपयोग और स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया को व्यवहारिक रूप से समझाया। इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर अनिल तलैया, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. एन.के. गुप्ता, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक प्रबंधक अमित श्रीवास्तव, जिला विपणन अधिकारी श्री धुर्वे, कृषि विभाग के अधिकारी और अन्य संबंधित कर्मचारी मौजूद रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता की स्थिति को देखते हुए सभी किसान वास्तव में ई-टोकन प्रणाली का लाभ ले पाएंगे?
  2. यदि पोर्टल तकनीकी कारणों से बंद हो जाए या स्लॉट बुकिंग में गड़बड़ी हो, तो किसानों को तत्काल खाद उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी?
  3. प्रशासन कालाबाजारी रोकने का दावा कर रहा है, लेकिन क्या उर्वरक वितरण केंद्रों की वास्तविक निगरानी और स्टॉक ऑडिट की भी कोई मजबूत व्यवस्था बनाई गई है?

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