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| भोपाल में टीबी पर हेल्थ अलर्ट! अस्पताल आने वाले हर संवेदनशील मरीज की अब होगी अनिवार्य स्क्रीनिंग Aajtak24 News |
भोपाल - राजधानी भोपाल में टीबी उन्मूलन अभियान को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब और ज्यादा सख्त नजर आ रहा है। जिला क्षय रोग केंद्र में आयोजित समीक्षा बैठक में साफ संकेत दिए गए कि अब स्वास्थ्य संस्थाओं में आने वाले संवेदनशील और जोखिम वाले वर्ग के मरीजों की प्रीसम्पटिव टीबी स्क्रीनिंग अनिवार्य रूप से की जाएगी। बैठक में क्षय उन्मूलन एवं एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को लक्ष्य आधारित काम करने के निर्देश दिए गए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. मनीष शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में 100 दिवसीय निक्षय अभियान की वर्तमान स्थिति, मरीजों की पहचान, उपचार व्यवस्था और पोर्टल आधारित मॉनिटरिंग को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। स्वास्थ्य अधिकारियों से पूछा गया कि मैदानी स्तर पर संभावित टीबी मरीजों तक पहुंचने और उन्हें समय पर उपचार से जोड़ने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं।
बैठक में टीबी जागरूकता अभियान, संभावित मरीजों की पहचान, स्पूटम कलेक्शन और निक्षय पोर्टल पर प्रिजम्प्टिव आईडी बनाने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि मरीजों के पंजीयन, उपचार सहायता और डॉट्स दवाओं की उपलब्धता को लेकर अलग-अलग स्तर पर निगरानी की जा रही है। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य संस्थाओं में आने वाले “वनरेबल पॉपुलेशन” यानी संवेदनशील और उच्च जोखिम वाले लोगों की टीबी के लिए अनिवार्य स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक संभावित मरीज की जानकारी निक्षय पोर्टल पर दर्ज कर उसकी निक्षय आईडी बनाई जाए ताकि उपचार और फॉलोअप में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
बैठक में यह भी कहा गया कि क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की उपलब्धियों और कमियों का साप्ताहिक आधार पर विश्लेषण किया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिन क्षेत्रों में टीबी मरीजों की पहचान कम हो रही है, वहां विशेष अभियान चलाकर जांच और जागरूकता बढ़ाई जाए। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय पर स्क्रीनिंग और पोर्टल आधारित निगरानी से टीबी के मामलों की पहचान तेजी से होगी और मरीजों को शुरुआती चरण में ही उपचार मिल सकेगा। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि केवल बैठकों और पोर्टल एंट्री से टीबी उन्मूलन संभव नहीं होगा, जब तक मैदानी स्तर पर जांच सुविधाएं, दवाओं की उपलब्धता और फॉलोअप व्यवस्था पूरी तरह मजबूत नहीं होती।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि टीबी उन्मूलन अभियान लगातार चल रहा है, तो भोपाल में अब भी बड़ी संख्या में मरीज देरी से क्यों चिन्हित हो रहे हैं और संक्रमण का खतरा क्यों बना हुआ है?
- निक्षय पोर्टल पर पंजीयन और आईडी बनाने की बात हो रही है, लेकिन क्या स्वास्थ्य विभाग के पास ऐसे आंकड़े हैं कि पंजीकृत मरीजों में से कितने लोग बीच में इलाज छोड़ देते हैं?
- वनरेबल पॉपुलेशन की अनिवार्य स्क्रीनिंग के निर्देश दिए गए हैं, तो क्या सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त जांच संसाधन और स्टाफ उपलब्ध हैं या यह आदेश केवल कागजों तक सीमित रहेगा?
