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| आगर-मालवा; खेती का नया फॉर्मूला! कम लागत, ज्यादा उत्पादन और बढ़ी आय का मंत्र किसानों को मिला Aajtak24 News |
आगर-मालवा - आगर-मालवा में किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र में “संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, नरवाई प्रबंधन एवं समन्वित खेती प्रणाली” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कलेक्टर प्रीति यादव के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में जिलेभर से बड़ी संख्या में किसान और कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ए.के. दीक्षित ने किसानों को फसलों में संतुलित उर्वरकों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यूरिया, डीएपी, कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर, सल्फर और जिंक का सही मात्रा में उपयोग करने से उत्पादन बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है।
किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के अधिकारी विजय चौरसिया ने “ई-विकास प्रणाली” के माध्यम से उर्वरकों की पारदर्शी और आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ई-टोकन प्रणाली की जानकारी दी। किसानों को मौके पर ई-टोकन बुकिंग का प्रायोगिक प्रदर्शन भी कराया गया। कार्यशाला में फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए किसानों को नई फसलें अपनाने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि बदलते मौसम और बाजार की मांग को देखते हुए एक ही फसल पर निर्भर रहना किसानों के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है।
नरवाई प्रबंधन पर किसानों को गहरी जुताई, रोटावेटर से नरवाई को मिट्टी में मिलाने और वेस्ट डी-कंपोजर किट के उपयोग की जानकारी दी गई। वहीं वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव ने फसल प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के उपाय बताए। उद्यानिकी विभाग के अशोक झंकारे ने विभागीय योजनाओं और सब्सिडी की जानकारी दी, जबकि पशुपालन विभाग के डॉ. आर.सी. पवार ने पशुपालन, टीकाकरण, रोग रोकथाम और साइलेज निर्माण पर मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम में कृषि विभाग और आत्मा परियोजना के अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्यशालाएं किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर तकनीकी और लाभकारी खेती की ओर ले जाने में मददगार साबित होंगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- हर साल ऐसी कार्यशालाएं होती हैं, लेकिन क्या प्रशासन के पास यह आंकड़ा है कि कितने किसानों ने वास्तव में इन तकनीकों को अपनाया और उनकी आय बढ़ी?
- ई-टोकन और डिजिटल व्यवस्था की बात हो रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट की कमी के बीच छोटे किसान इसका लाभ कैसे उठाएंगे?
- नरवाई प्रबंधन पर प्रशिक्षण तो दिया जा रहा है, लेकिन क्या किसानों को इसके लिए पर्याप्त मशीनरी और आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है?
