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| टीकमगढ़; जन्म के बाद 42 दिन सबसे अहम! टीकमगढ़ में नवजातों की जिंदगी बचाने के लिए शुरू हुई खास ट्रेनिंग Aajtak24 News |
टीकमगढ़ - जिले में नवजात शिशु मृत्यु दर कम करने और शिशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला चिकित्सालय में शहरी एएनएम को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय के निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ओ.पी. अनुरागी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।प्रशिक्षण के दौरान जिला कार्यक्रम प्रबंधक अंकित रावत ने कहा कि जिले में शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए गर्भवती महिलाओं की गर्भकालीन देखभाल बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की छह आवश्यक जांचें समय पर कराना अनिवार्य है। साथ ही संतुलित आहार और स्वास्थ्य संबंधी सही परामर्श से जन्म के बाद बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सकता है।
प्रशिक्षण में जिला समुदाय प्रबंधक प्रबल त्रिपाठी ने बताया कि नवजात शिशु के जन्म के बाद शुरुआती 42 दिन बेहद संवेदनशील होते हैं। इस अवधि में आशा कार्यकर्ता और एएनएम द्वारा घर-घर जाकर शिशु की निगरानी की जाती है। इसमें यह देखा जाता है कि बच्चा सही तरीके से स्तनपान कर रहा है या नहीं, उसका वजन और धड़कन सामान्य है या नहीं, तथा उसमें निमोनिया, दस्त या अन्य गंभीर बीमारियों के लक्षण तो नहीं हैं। प्रशिक्षण में बच्चों के समय पर टीकाकरण, व्यक्तिगत स्वच्छता और मां-बच्चे की नियमित स्वास्थ्य निगरानी पर भी जोर दिया गया। इसके साथ ही सभी एएनएम को पोर्टल पर समय-सीमा में ऑनलाइन एंट्री सुनिश्चित करने का प्रशिक्षण भी दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि जन्म के बाद शुरुआती दिनों में सही निगरानी और उपचार मिले तो नवजात शिशुओं की मौत के मामलों में बड़ी कमी लाई जा सकती है। इसी उद्देश्य से जिले में स्वास्थ्य कर्मचारियों को लगातार प्रशिक्षित किया जा रहा है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- अगर नवजात की गृह आधारित देखभाल इतनी जरूरी है, तो जिले में अब तक शिशु मृत्यु दर कम करने में अपेक्षित सफलता क्यों नहीं मिल पाई?
- क्या जिले में आशा और एएनएम की संख्या इतनी पर्याप्त है कि वे हर नवजात शिशु के घर तक नियमित रूप से पहुंच सकें?
- ऑनलाइन पोर्टल एंट्री और मॉनिटरिंग की बात हो रही है, लेकिन ग्रामीण और नेटवर्क प्रभावित क्षेत्रों में डेटा अपडेट की वास्तविक स्थिति क्या है?
