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| बैतूल; डॉक्टर गायब तो कार्रवाई तय’… बैतूल कलेक्टर का अस्पताल में सख्त संदेश Aajtak24 News |
बैतूल - जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पताल व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक लेते हुए चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को स्पष्ट संदेश दिया कि मरीजों को इलाज के लिए परेशान नहीं होना चाहिए। जिला चिकित्सालय के मीटिंग हॉल में आयोजित बैठक में कलेक्टर ने विशेषज्ञ चिकित्सकों और अधिकारियों से परिचय प्राप्त करने के बाद अस्पताल संचालन में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने सुबह निरीक्षण में अनुपस्थित पाए गए डॉक्टरों से जवाब भी मांगा।
कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने कहा कि जिला अस्पताल में दूर-दराज क्षेत्रों से मरीज इलाज के लिए आते हैं, इसलिए डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि चिकित्सक समय पर उपस्थित नहीं होंगे और मरीज परेशान होते रहेंगे तो ऐसी स्थिति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में मरीजों और उनके परिजनों के साथ संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि अस्पताल केवल इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि भरोसे का स्थान होना चाहिए, जहां मरीज सम्मान और संवेदना महसूस करें।
समीक्षा बैठक के दौरान जिला चिकित्सालय में “रेफर इन” और “रेफर आउट” मरीजों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों से मरीजों को रेफर किए जाने के कारणों पर चर्चा कर आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। साथ ही चिकित्सकों के रिक्त पदों और आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। कलेक्टर ने नर्सिंग स्टाफ की भूमिका पर भी विशेष जोर देते हुए मेट्रन से कार्यदायित्वों की जानकारी ली और सभी कर्मचारियों को जिम्मेदारी तथा संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े, सिविल सर्जन डॉ. जगदीश घोरे, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. प्रांजल उपाध्याय, आरएमओ डॉ. रानू वर्मा सहित विशेषज्ञ चिकित्सक और अस्पताल स्टाफ मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- अगर जिला अस्पताल में डॉक्टर समय पर नहीं पहुंच रहे थे, तो अब तक उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई और जिम्मेदारी किसकी तय की गई?
- बार-बार मरीजों को रेफर करने की स्थिति क्या जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और संसाधनों की कमी को नहीं दर्शाती?
- मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार की बात हर समीक्षा बैठक में होती है, लेकिन अस्पतालों में शिकायतें लगातार क्यों बनी रहती हैं?
