सागर; तलाक की दहलीज से लौटे रिश्ते! अदालत की समझाइश ने फिर मिला दिए बिछड़े पति-पत्नी Aajtak24 News

सागर; तलाक की दहलीज से लौटे रिश्ते! अदालत की समझाइश ने फिर मिला दिए बिछड़े पति-पत्नी Aajtak24 News

सागर - सागर परिवार न्यायालय में ऐसे दो मामलों का समाधान हुआ, जहां रिश्ते टूटने की कगार पर पहुंच चुके थे, लेकिन अदालत की समझाइश ने परिवारों को फिर एक कर दिया। वर्षों से अलग रह रहे दंपत्तियों ने आखिरकार अपने मतभेद भुलाकर साथ रहने का निर्णय लिया। पहला मामला प्रधान जिला न्यायाधीश एम.के. शर्मा की अदालत से जुड़ा रहा। यहां आवेदक ने अपनी पत्नी के खिलाफ दाम्पत्य जीवन की पुनर्स्थापना के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। पति का आरोप था कि पत्नी बार-बार मायके चली जाती थी और 17 अगस्त 2021 से दोनों अलग-अलग रह रहे थे।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा पति-पत्नी को अलग-अलग और संयुक्त रूप से समझाइश दी गई। लगातार संवाद और काउंसलिंग के बाद दोनों ने साथ रहने पर सहमति जताई और मामला सुलझ गया। दूसरा मामला पीठासीन अधिकारी कुटुंब न्यायालय अखिलेष कुमार मिश्र की अदालत में सामने आया। यहां पति-पत्नी पिछले दो वर्षों से वैचारिक मतभेदों के कारण अलग रह रहे थे। दोनों की 14 वर्षीय पुत्री भी है, लेकिन विवाद खत्म नहीं होने पर दंपत्ति ने विवाह विच्छेद यानी तलाक का आवेदन अदालत में पेश किया था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को उनकी बेटी के भविष्य और परिवार की अहमियत को लेकर समझाइश दी। न्यायालय की पहल के बाद दोनों पक्षों ने तलाक की प्रक्रिया आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया और आपसी सहमति से दोबारा साथ रहने को तैयार हो गए। इन दोनों मामलों ने यह संदेश दिया कि कई बार संवाद, समझ और सही मार्गदर्शन से टूटते रिश्तों को बचाया जा सकता है। अदालत परिसर में समझौते के बाद परिवारों के चेहरों पर लौटती खुशी भावुक कर देने वाली रही।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. परिवार न्यायालयों में समझौते से रिश्ते जोड़ने की बात होती है, लेकिन क्या ऐसे मामलों में बाद की काउंसलिंग और निगरानी की कोई व्यवस्था भी होती है ताकि विवाद दोबारा न बढ़ें?
  2. क्या न्यायालय यह सुनिश्चित करता है कि समझौता किसी सामाजिक या पारिवारिक दबाव में नहीं बल्कि दोनों पक्षों की वास्तविक सहमति से हुआ है?
  3. वैवाहिक विवादों के बढ़ते मामलों को देखते हुए क्या जिले में विवाह परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य सहायता केंद्रों को मजबूत करने की कोई योजना है?

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