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| रीवा पुलिस लाइन में खूनी खेल: खाकी पर लगा 'अपराध' का दाग, विभाग के ही चालक ने पुलिसकर्मी पर किया टांगी-तलवार से हमला Aajtak24 News |
रीवा - विंध्य की राजधानी कहे जाने वाले रीवा में अब कानून के रखवाले ही सुरक्षित नहीं हैं। जब पुलिस का अपना घर यानी 'पुलिस लाइन' ही खूनी गैंगवार का अखाड़ा बन जाए, तो आम जनता की सुरक्षा की उम्मीद करना बेमानी लगता है। रविवार की रात रीवा की पुलिस लाइन कॉलोनी में वर्दी को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी वारदात हुई, जिसने न केवल पुलिस महकमे के अनुशासन को तार-तार कर दिया है, बल्कि पूरे शहर को दहशत में डाल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
बिछिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पुलिस लाइन कॉलोनी में रविवार रात करीब 10 बजे खूनी मंजर देखने को मिला। मनगवां थाने में पदस्थ मुकेश तिवारी जब अपनी ड्यूटी के बाद घर लौटे, तो वहां पहले से ही मौत का जाल बिछा हुआ था। पुलिस विभाग में ही चालक के पद पर तैनात सुरेंद्र पांडे उर्फ मामा, अपने पुत्र और अन्य साथियों के साथ घात लगाकर बैठा था।
जैसे ही मुकेश घर के करीब पहुँचे, सुरेंद्र और उसके साथियों ने टांगी और तलवार जैसे घातक हथियारों से उन पर हमला कर दिया। चीख-पुकार सुनकर परिजन और पड़ोसी बाहर आए, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। मुकेश तिवारी को लहूलुहान हालत में संजय गांधी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ स्थिति बिगड़ने पर उन्हें तत्काल नागपुर रेफर किया गया है।
वर्दी के पीछे छिपा 'अपराधी' चेहरा
घटना के पीछे का कारण बेहद शर्मनाक बताया जा रहा है। घायल की पत्नी का आरोप है कि आरोपी सुरेंद्र पांडे लंबे समय से उनके साथ अभद्रता और अश्लील हरकतें कर रहा था। विरोध करने पर उसने इस वारदात को अंजाम दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी सुरेंद्र पांडे का इतिहास पहले से ही विवादित रहा है और वह कई बार अनुशासनात्मक कार्रवाई की चपेट में आ चुका है। ऐसे में सवाल विभाग पर उठता है कि एक आदतन अपराधी मानसिकता वाले व्यक्ति को अब तक विभाग में क्यों बनाए रखा गया?
रीवा की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर प्रहार
यह घटना रीवा के वर्तमान हालातों की पोल खोलती है:
सुरक्षित इलाकों में असुरक्षा: यदि पुलिस लाइन के अंदर पुलिसकर्मी सुरक्षित नहीं है, तो रीवा का आम नागरिक कहाँ जाए?
नशे का बढ़ता जाल: विंध्य में बढ़ते नशे और अवैध कारोबार ने अब पुलिस महकमे के भीतर भी आपराधिक प्रवृत्ति को जन्म दे दिया है।
प्रशासनिक शिथिलता: वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा केवल कागजी कार्रवाई और 'दिखावे' के कारण ही ऐसे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
गृहमंत्री और मुख्यमंत्री से सीधे सवाल
रीवा में जंगलराज की यह स्थिति अब बर्दाश्त के बाहर है। गृह मंत्रालय संभाल रहे मुख्यमंत्री जी से जनता सवाल कर रही है कि क्या विंध्य में खाकी के भीतर छिपे इन 'भेड़ियों' पर कोई ठोस कार्रवाई होगी? क्या पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस शर्मनाक नाकामी की जिम्मेदारी लेंगे?
रीवा में अब अपराधी बेखौफ हैं, चाहे वे बाहर हों या खाकी के भीतर। यदि समय रहते पुलिस प्रशासन ने अपने भीतर की गंदगी को साफ नहीं किया और नशे व अपराध के इस गठजोड़ को नहीं तोड़ा, तो रीवा की पहचान 'शिक्षा और संस्कृति' के बजाय 'अपराध और अराजकता' के रूप में होने लगेगी।
