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| रीवा: 'अमहिया मार्ग' के चौड़ीकरण में बड़ा खेल? फाइलों में दौड़ रही 22 मीटर की सड़क Aajtak24 News |
रीवा - विंध्य की हृदयस्थली रीवा में विकास योजनाओं का हश्र क्या होता है, इसका जीता-जागता उदाहरण 'अमहिया मार्ग' का बहुप्रतीक्षित चौड़ीकरण प्रोजेक्ट है। नगर निगम और प्रशासन की फाइलों में करोड़ों की लागत वाली यह योजना अब जनता के लिए जी का जंजाल बन चुकी है। जिस सड़क को शहर की 'लाइफलाइन' के रूप में 22 मीटर चौड़ा करने का सपना दिखाया गया था, वह प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण अब महज 12 मीटर की संकरी गली में तब्दील होती दिख रही है।
करोड़ों का धुआं: सड़क बनी नहीं, बिजली पोल पर खर्च हो गया खजाना
इस परियोजना में सबसे चौंकाने वाला पहलू 'खर्च और प्रगति' का गणित है। स्थानीय सूत्रों और जानकारों की मानें तो सड़क चौड़ीकरण का काम अभी धरातल पर शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन बिजली के खंभों (पोल शिफ्टिंग) को हटाने और लगाने के नाम पर ही करीब 1.5 से 2 करोड़ रुपए स्वाहा किए जा चुके हैं। सवाल यह उठता है कि जब सड़क की अंतिम चौड़ाई ही तय नहीं थी, तो पोल शिफ्टिंग में इतनी जल्दबाजी और भारी-भरकम खर्च किसके इशारे पर किया गया? क्या यह जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग नहीं है?
22 से 12 मीटर का सफर: आखिर किसके दबाव में सिमटी योजना?
अमहिया मार्ग को शुरुआत में 22 मीटर चौड़ा करने का प्रस्ताव था ताकि शहर की बढ़ती यातायात व्यवस्था और जाम से मुक्ति मिल सके। लेकिन धीरे-धीरे यह दायरा कम होता गया। पहले इसे कम किया गया और अब चर्चा है कि यह केवल 12 मीटर तक सीमित रह जाएगी।
दबाव का खेल: चर्चा है कि मार्ग पर स्थित रसूखदारों और रसूखदार अतिक्रमणकारियों को बचाने के लिए प्रशासन ने बार-बार नक्शे बदले हैं।
अधूरी तैयारी: बिना किसी ठोस सर्वे और अतिक्रमण हटाने की रणनीति के कागजों पर योजनाएं बनाना ही इस प्रोजेक्ट की नाकामी का मुख्य कारण है।
जनता बेहाल: जाम और धूल के बीच कट रही जिंदगी
अमहिया मार्ग रीवा का सबसे व्यस्त व्यापारिक और रहवासी इलाका है। यहाँ से गुजरने वाले हजारों लोग रोजाना घंटों ट्रैफिक जाम में फंसते हैं। चौड़ीकरण के नाम पर की गई आधी-अधूरी खुदाई और लटके हुए बिजली के तार अब हादसों को दावत दे रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि "प्रशासन ने विकास के नाम पर केवल तमाशा किया है। सड़क चौड़ी होने के बजाय और भी खतरनाक हो गई है।"
प्रशासन की चुप्पी और उठते सवाल
इस पूरे मामले में नगर निगम और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है:
जब चौड़ीकरण 12 मीटर ही करना था, तो करोड़ों के भारी-भरकम प्रोजेक्ट का ढिंढोरा क्यों पीटा गया?
क्या पोल शिफ्टिंग के नाम पर हुए खर्च की कोई उच्चस्तरीय जांच होगी?
रीवा के मास्टर प्लान के साथ बार-बार छेड़छाड़ क्यों की जा रही है?
अमहिया मार्ग चौड़ीकरण अब केवल एक सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार और अदूरदर्शिता का प्रतीक बन गया है। अगर जल्द ही इस योजना को पारदर्शी तरीके से पूरा नहीं किया गया, तो यह रीवा के माथे पर 'सफेद हाथी' जैसा कलंक साबित होगा।
