घर-घर पहुंचा प्रशासन! कलेक्टर खुद उतरे मैदान में, बोले— ‘जनगणना में एक भी व्यक्ति छूटा तो होगी जवाबदेही Aajtak24 News

घर-घर पहुंचा प्रशासन! कलेक्टर खुद उतरे मैदान में, बोले— ‘जनगणना में एक भी व्यक्ति छूटा तो होगी जवाबदेही Aajtak24 News

गुना - जिले में जनगणना और मकान सूचीकरण कार्य को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। आंकड़ों की शुद्धता और कार्य की गति सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल खुद मैदान में उतर गए। उन्होंने नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 27 में चल रहे मकान सूचीकरण कार्य का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों-कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए कि जनगणना में किसी भी व्यक्ति या मकान का नाम छूटना नहीं चाहिए। कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान जनगणना ब्लॉक 217 में पहुंचकर फील्ड में कार्यरत प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की उपस्थिति का सत्यापन किया। उन्होंने मौके पर मोबाइल एप के जरिए डाटा फीडिंग की प्रक्रिया भी देखी और जानकारी ली कि मैदानी स्तर पर कार्य किस गति से चल रहा है। निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अमले में भी सक्रियता दिखाई दी।

कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सूचीकरण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कई बार तकनीकी त्रुटियों या फील्ड स्तर की चूक के कारण वास्तविक आंकड़े प्रभावित हो जाते हैं, इसलिए सभी प्रगणक प्राप्त डाटा का क्रॉस वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से करें। उन्होंने तकनीक का अधिकतम उपयोग कर कार्य में तेजी लाने पर भी जोर दिया। निरीक्षण के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी मौजूदगी रही। नगर पालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता, उपाध्यक्ष धरम सोनी और पार्षदगण मौके पर मौजूद रहे। इसके अलावा मुख्य नगर पालिका अधिकारी मंजुषा खत्री, जिला प्रभारी जनगणना मनोज कनाडे सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी निरीक्षण में शामिल हुए।

प्रशासन का कहना है कि जनगणना केवल आंकड़ों का कार्य नहीं बल्कि भविष्य की सरकारी योजनाओं और संसाधनों के वितरण का आधार होती है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति या परिवार का नाम सूचीकरण से छूट जाता है तो वह कई योजनाओं और सुविधाओं से वंचित हो सकता है। इसी कारण जिला प्रशासन इस बार तकनीक आधारित मॉनिटरिंग और फील्ड निरीक्षण पर विशेष फोकस कर रहा है। हालांकि कई क्षेत्रों में नेटवर्क समस्या, तकनीकी दिक्कतें और कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव जैसी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन द्वारा तय की गई समयसीमा में कितनी सटीकता और पारदर्शिता के साथ जनगणना कार्य पूरा हो पाता है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि जनगणना कार्य पूरी तरह तकनीक आधारित किया जा रहा है, तो नेटवर्क और एप संबंधी समस्याओं से जूझ रहे फील्ड कर्मचारियों के लिए प्रशासन ने क्या वैकल्पिक व्यवस्था की है?
  2. कलेक्टर ने ‘कोई व्यक्ति न छूटे’ के निर्देश दिए हैं, लेकिन क्या प्रशासन के पास ऐसे क्षेत्रों की सूची है जहां अब तक सूचीकरण कार्य अधूरा या संदिग्ध माना जा रहा है?
  3. जनगणना कार्य में लगातार जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी देखी जा रही है, तो क्या प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि राजनीतिक हस्तक्षेप से आंकड़ों की निष्पक्षता प्रभावित न हो?

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