![]() |
| अशोकनगर; फाइलों से बाहर निकलो! कमिश्नर की दो टूक— योजनाएं जमीन पर दिखनी चाहिए, सिर्फ बैठकों में नहीं Aajtak24 News |
अशोकनगर - अशोकनगर में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में ग्वालियर संभाग के आयुक्त मनोज खत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि शासन की योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिएं, बल्कि उनका लाभ तय समय में आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हुई इस बैठक में विकास कार्यों की धीमी गति, लंबित प्रकरणों और शिकायतों के निराकरण को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए। बैठक में कमिश्नर ने सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण समाधान, जल संरक्षण, स्वच्छता अभियान, राजस्व प्रकरणों के निराकरण और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे नियमित रूप से फील्ड में जाएं और समस्याओं का समाधान संवेदनशीलता के साथ करें।
बैठक में शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान नामांकन बढ़ाने और स्कूल ड्रॉप आउट कम करने पर विशेष फोकस किया गया। साथ ही छात्रों को समय पर पुस्तक वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के पंजीकरण और निर्माणाधीन भवनों की स्थिति पर भी अधिकारियों से जवाब मांगा गया। कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान संवेदनशील इलाकों के जोनल प्लान, नशे के खिलाफ अभियान, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता गतिविधियां और अनुसूचित जाति-जनजाति के खिलाफ अपराधों की रोकथाम जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कमिश्नर ने नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जिला स्तरीय समितियों की नियमित बैठकों के निर्देश दिए।
बैठक में सड़क सुरक्षा समिति, पीएम राहत योजना, राहवीर योजना, अमृत सरोवर तालाबों की लीज, जल गंगा संवर्धन अभियान और प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। वन अधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक दावों और जनजातीय क्षेत्रों में चल रही योजनाओं को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। इस दौरान कलेक्टर साकेत मालवीय, पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ राजेश जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- हर समीक्षा बैठक में योजनाओं को “तेजी से लागू करने” और “फील्ड निरीक्षण” के निर्देश दिए जाते हैं, फिर भी ज़मीनी स्तर पर शिकायतें और अधूरे काम लगातार क्यों सामने आते हैं?
- यदि सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के समाधान की गुणवत्ता पर बार-बार सवाल उठ रहे हैं, तो क्या विभाग सिर्फ शिकायतें बंद करने का काम कर रहे हैं, समाधान का नहीं?
- स्कूल ड्रॉप आउट, नशे की बढ़ती समस्या और अधूरे निर्माण कार्यों पर लगातार बैठकें हो रही हैं, लेकिन क्या प्रशासन यह बताएगा कि पिछले एक वर्ष में इन मामलों में वास्तविक सुधार कितना हुआ?
