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| झाबुआ; भीषण गर्मी में मां-बेटी ने कर दिखाया कमाल! जनगणना में बनाया ऐसा रिकॉर्ड Aajtak24 News |
झाबुआ - जिले में जनगणना 2027 के तहत चल रहे मकान सूचीकरण कार्य के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ मां-बेटी के रिश्ते और बेटियों की शिक्षा का प्रेरणादायक संदेश भी दिया। भीषण गर्मी और ग्रामीण क्षेत्रों की चुनौतियों के बीच मां-बेटी की एक जोड़ी ने न केवल अपना काम समय से पहले पूरा किया, बल्कि जिले में मिसाल भी बन गई। कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने जिले में मकान सूचीकरण कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण करने वाले 30 प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को सम्मानित किया। इसी दौरान अंतरवेलिया क्षेत्र की प्रगणक उर्मिला परमार और उनकी बेटी अंजली परमार विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
मां-बेटी दोनों ने टीम भावना के साथ कार्य करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में मकान सूचीकरण का कार्य समयपूर्व पूरा किया। फील्ड में ग्रामीणों से संपर्क, जागरूकता और तकनीक के उपयोग के जरिए उन्होंने जनगणना कार्य को आसान और प्रभावी बनाया। प्रशासन ने इसे जनभागीदारी और महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण बताया।
सम्मान समारोह के दौरान भावुक माहौल भी देखने को मिला। मदर्स डे से ठीक पहले मंच पर मां-बेटी की इस उपलब्धि को सराहा गया। इस दौरान उर्मिला परमार ने बताया कि उनकी दूसरी बेटी आयुषी परमार एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं। उन्होंने बेटियों की शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए अभिभावकों से बेटियों को आगे बढ़ाने की अपील की।
कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने कहा कि जनगणना जैसा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य तभी सफल हो सकता है जब समाज के हर वर्ग की भागीदारी हो। उन्होंने महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को सकारात्मक बदलाव का संकेत बताते हुए कहा कि समर्पण और पारिवारिक सहयोग से कठिन से कठिन जिम्मेदारी भी पूरी की जा सकती है। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी मां-बेटी की इस जोड़ी की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणा बताया।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जनगणना कार्य में कर्मचारियों को भीषण गर्मी और ग्रामीण कठिनाइयों के बीच काम करना पड़ रहा है, क्या प्रशासन ने उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए हैं या सिर्फ लक्ष्य पूरा कराने पर जोर है?
- जिले में 30 प्रगणकों को समयपूर्व कार्य पूरा करने पर सम्मानित किया गया, लेकिन क्या प्रशासन यह बताएगा कि बाकी क्षेत्रों में काम धीमा क्यों है और वहां क्या समस्याएं सामने आ रही हैं?
- डिजिटल ऐप के जरिए जनगणना को आसान बनाने की बात कही जा रही है, लेकिन क्या ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क और तकनीकी दिक्कतों को लेकर कोई ठोस व्यवस्था बनाई गई है?
