झाबुआ; शाबाशी भी, फटकार भी” — झाबुआ कलेक्टर की बैठक में खुली विभागों की पोल Aajtak24 News

झाबुआ; शाबाशी भी, फटकार भी” — झाबुआ कलेक्टर की बैठक में खुली विभागों की पोल Aajtak24 News

झाबुआ - कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट की अध्यक्षता में आयोजित समयावधि एवं अंतर्विभागीय समन्वय बैठक में सोमवार को प्रशासन का दोहरा चेहरा देखने को मिला। जहां बेहतर काम करने वाले अधिकारियों की खुलकर सराहना की गई, वहीं लंबित कार्यों, सीएम हेल्पलाइन शिकायतों और जल संरक्षण अभियान में सुस्ती पर अधिकारियों को कड़ी फटकार भी लगी। बैठक में कई विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई के संकेत दिए गए। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में कलेक्टर ने सबसे पहले शनिवार स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में सकारात्मक कार्य संस्कृति विकसित करना जरूरी है। इसके साथ ही अधिकारियों को नियमित फील्ड विजिट करने की नसीहत देते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर पहुंचकर समस्याओं का समाधान करना ही वास्तविक प्रशासनिक जवाबदेही है।

बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.एस. बघेल की स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के लिए सराहना की गई, वहीं जनसुनवाई के मामलों का त्वरित निराकरण करने पर एसडीएम महेश मंडलोई की प्रशंसा हुई। जनगणना कार्य को कुशलतापूर्वक पूरा करने के लिए जिला जनगणना अधिकारी श्रीमती रीतिका पाटीदार और पूरी टीम को भी सराहा गया। लेकिन बैठक का सबसे सख्त रुख सीएम हेल्पलाइन और लंबित योजनाओं को लेकर देखने को मिला। कलेक्टर ने नॉन-अटेंडेंट शिकायतों पर नाराज़गी जताते हुए अधिकारियों को चेतावनी दी कि शिकायतों का समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए। पेटलावद क्षेत्र में एक गर्भवती महिला से इलाज के बदले पैसे मांगने और उपचार न देने के मामले पर कलेक्टर ने तीखी नाराज़गी जताई और स्पष्ट कहा कि ऐसी अमानवीय लापरवाही किसी भी हाल में स्वीकार नहीं होगी।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समयसीमा से बाहर चल रहे मामलों पर बीईओ रामा, फॉरेस्ट रेंजर और नायब तहसीलदार झाबुआ को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। इससे साफ संकेत मिला कि अब लंबित मामलों पर प्रशासन सख्त कार्रवाई के मूड में है। जल गंगा संवर्धन अभियान की समीक्षा में जब 3200 से अधिक कार्य लंबित पाए गए तो कलेक्टर ने गहरी नाराज़गी व्यक्त की। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा और मनरेगा अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी कार्य तय समयसीमा में पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण अभियान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पेयजल संकट की समीक्षा में सामने आया कि जिले में बड़ी संख्या में हैंडपंप बंद पड़े हैं। इस पर कलेक्टर ने रेड जोन में शामिल 2820 हैंडपंपों में रिचार्ज पिट निर्माण कराने के निर्देश दिए। नगरीय क्षेत्रों में भी बंद नलकूपों और हैंडपंपों को लेकर नाराज़गी जताई गई। कलेक्टर ने जल आपूर्ति का निश्चित समय तय कर जनता को जानकारी देने और समय पर पानी नहीं मिलने पर संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी। बैठक में वनाधिकार दावों, भूमि आवंटन, आदर्श ग्राम योजना और बालिका शौचालय निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने कहा कि चयनित ग्रामों को आदर्श ग्राम बनाने के लिए सतत प्रयास किए जाएं और ग्रामीण समस्याओं के समाधान के लिए ग्राम चौपाल आयोजित की जाए।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब जल गंगा संवर्धन अभियान सरकार की प्राथमिकता है, तो जिले में 3200 से अधिक कार्य अब तक लंबित क्यों हैं? क्या यह प्रशासनिक विफलता नहीं है?
  2. गर्भवती महिला से इलाज के बदले पैसे मांगने का मामला सामने आने के बाद क्या स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता पर कोई बड़ी कार्रवाई होगी?
  3. सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गारंटी के मामलों में लगातार पेंडेंसी क्या यह साबित नहीं करती कि कई विभाग सिर्फ कागजी जवाब देकर काम चला रहे हैं?

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