इंदौर; मौत के बाद भी धड़कता रहेगा जीवन: इंदौर में अंगदान की अलख जगाने उतरे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स Aajtak24 News

इंदौर; मौत के बाद भी धड़कता रहेगा जीवन: इंदौर में अंगदान की अलख जगाने उतरे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स Aajtak24 News

इंदौर - इंदौर में अंगदान और देहदान को लेकर अब सोशल मीडिया के जरिए बड़ा जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शहर के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंशर्स को इस मुहिम से जोड़ते हुए समाज में फैली भ्रांतियों और डर को दूर करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। बैठक में अंगदान की पूरी प्रक्रिया, इससे मिलने वाले जीवनदान और इंदौर में हुए उल्लेखनीय कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई।

संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि अंगदान केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। इससे कई लोगों को नया जीवन मिलता है और मृत व्यक्ति समाज में हमेशा जीवित रहता है। उन्होंने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में लोग अंधविश्वास और सामाजिक डर के कारण अंगदान से पीछे हट जाते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंशर्स समाज की सोच बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

“इंदौर बना अंगदान की राजधानी”

बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश में सबसे अधिक अंगदान और देहदान इंदौर में हो रहे हैं। यहां एयर एम्बुलेंस सुविधा और ग्रीन कॉरिडोर जैसी व्यवस्थाओं ने कई गंभीर मरीजों को नया जीवन दिया है। मुस्कान ग्रुप के संदीपन आर्य ने बताया कि इंदौर में पहला ग्रीन कॉरिडोर वर्ष 2015 में बनाया गया था और अब तक 67 बार ग्रीन कॉरिडोर तैयार किए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में 2237 नेत्रदान हुए थे, जो 2025 में बढ़कर 2748 तक पहुंच गए। वहीं अंगदान अनुमति के मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में 135 मामलों में अनुमति दी गई थी, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 202 तक पहुंच गया।

“मृत्यु के बाद भी जीवन संभव”

बैठक में अंगदान की प्रक्रिया को विस्तार से समझाते हुए बताया गया कि जीवित व्यक्ति लीवर, किडनी, बोन मैरो और रक्तदान कर सकता है। वहीं हृदय गति रुकने के बाद आंख, त्वचा, हड्डी और हार्ट वॉल्व दान किए जा सकते हैं। ब्रेन डेड घोषित व्यक्ति के हृदय, फेफड़े, लीवर, किडनी, पैनक्रियाज और अन्य अंग जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दे सकते हैं।

बैठक में ऐसे प्रेरणादायक उदाहरण भी साझा किए गए, जिनमें इंदौर से दान किए गए हाथ एक युवा इंजीनियर और गुजरात की एक युवती को प्रत्यारोपित किए गए। इन कहानियों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।

सोशल मीडिया से बदलेगी सोच

संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि आज सोशल मीडिया समाज की सोच बदलने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। यदि इन्फ्लुएंशर्स सकारात्मक संदेश देंगे, तो अंगदान को लेकर समाज में जागरूकता तेजी से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन का उद्देश्य केवल आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों में संवेदनशीलता और मानवता की भावना विकसित करना है। बैठक में मौजूद इन्फ्लुएंशर्स ने भी इस मुहिम में सक्रिय भूमिका निभाने और अंगदान को लेकर जागरूकता अभियान चलाने का भरोसा दिलाया।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब इंदौर में अंगदान को लेकर इतनी सफलता मिल रही है, तो मध्यप्रदेश के बाकी जिलों में अब तक इसी स्तर की व्यवस्था और जागरूकता क्यों नहीं बन पाई?
  2. अंगदान के मामलों में बढ़ोतरी के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन क्या ग्रामीण और गरीब परिवारों तक इसकी सही जानकारी और मेडिकल सहायता वास्तव में पहुंच रही है?
  3. सोशल मीडिया इन्फ्लुएंशर्स को जोड़ने की पहल अच्छी है, लेकिन क्या प्रशासन ने अस्पतालों में पारदर्शिता और अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए कोई स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था बनाई है?

Post a Comment

Previous Post Next Post