खरगोन; कुंदा नदी के किनारे ‘जनशक्ति का श्रमदान’… घाट की सफाई से गूंजा जल संरक्षण का संकल्प Aajtak24 News

खरगोन; कुंदा नदी के किनारे ‘जनशक्ति का श्रमदान’… घाट की सफाई से गूंजा जल संरक्षण का संकल्प Aajtak24 News

खरगोन - जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत कुंदा नदी के गणेश मंदिर घाट पर व्यापक श्रमदान और सफाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अभियान में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती छाया जोशी, एसडीएम श्री वीरेंद्र कटारे और सीएमओ सुश्री कमला कौल सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। इनके साथ गायत्री परिवार, मध्यप्रदेश शिक्षक सेवक संघ के पदाधिकारी, पत्रकार बंधु और स्थानीय नागरिकों ने भी श्रमदान कर घाट क्षेत्र की सफाई में योगदान दिया।

सभी प्रतिभागियों ने मिलकर घाट और आसपास के क्षेत्र से कचरा हटाया और नदी को स्वच्छ एवं संरक्षित रखने का संकल्प लिया। अधिकारियों ने कहा कि जल स्रोतों का संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। नगर पालिका अध्यक्ष छाया जोशी ने कहा कि ऐसे अभियान न केवल स्वच्छता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी पैदा करते हैं। वहीं एसडीएम वीरेंद्र कटारे ने कहा कि नदी संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास ही स्थायी समाधान का आधार हैं।

गायत्री परिवार और शिक्षक सेवक संघ के सदस्यों ने भी पर्यावरण संरक्षण पर अपने विचार साझा किए और नियमित स्वच्छता, जल संरक्षण तथा वृक्षारोपण की आवश्यकता पर जोर दिया। पत्रकारों ने इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने और जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने कुंदा नदी को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखने की शपथ ली, जिससे पूरा माहौल पर्यावरण संरक्षण के संकल्प से भर गया।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या इस तरह के श्रमदान अभियानों से नदी की वास्तविक स्थिति में दीर्घकालिक सुधार होता है, या यह केवल एक-दिनीय जागरूकता कार्यक्रम बनकर रह जाता है?
  2. कुंदा नदी में प्रदूषण और अतिक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन की स्थायी कार्ययोजना क्या है, और उसका क्रियान्वयन किस स्तर तक पहुंचा है?
  3. क्या स्थानीय निकायों के पास नदी संरक्षण के लिए पर्याप्त संसाधन और बजट उपलब्ध है, या फिर यह अभियान केवल जनभागीदारी पर ही निर्भर रहता है?

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