| मऊगंज में मछुआ समिति से संवाद और 197 जोड़ों का सामूहिक विवाह, योजनाओं और परंपरा का संगम Aajtak24 News |
मऊगंज - जिले में एक ओर जहां मछुआरों की आजीविका को मजबूत करने के लिए शासन की योजनाओं पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर सामाजिक समरसता का बड़ा उदाहरण सामने आया, जब 197 जोड़े मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह सम्मेलन में परिणय सूत्र में बंधे। सहायक संचालक मत्स्य पालन अंजना सिंह ने गोरमा और रामसागर जलाशय की मछुआ समितियों के सदस्यों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और शासन की योजनाओं की जानकारी दी। हनुमना विकासखंड के गोरमा जलाशय में आदिवासी मछुआ सहकारी समिति के सदस्यों के साथ आयोजित मछुआ चौपाल में उन्हें आधुनिक तकनीक अपनाकर मत्स्य पालन करने के लिए प्रेरित किया गया।
अधिकारियों ने मछुआरों को जलाशय में केज सिस्टम लगाकर कम मेहनत में अधिक उत्पादन और लाभ प्राप्त करने की जानकारी दी। वहीं मऊगंज विकासखंड के देवरी गांव स्थित रामसागर जलाशय की समिति को सहकारी बैंक में खाता खोलने और बचत सहाराहत योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि वे आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन सकें। इसी बीच नईगढ़ी में आयोजित जिला स्तरीय मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह सम्मेलन में सामाजिक समरसता और जनकल्याण का भव्य दृश्य देखने को मिला। कार्यक्रम में 197 जोड़े वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह और निकाह के बंधन में बंधे।
कार्यक्रम में हिंदू जोड़ों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए, वहीं मुस्लिम जोड़ों का निकाह पूरी धार्मिक परंपरा के साथ संपन्न हुआ। पूरा आयोजन सर्वधर्म समभाव और सामाजिक एकता का संदेश देता नजर आया। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने नवदंपत्तियों को आशीर्वाद दिया और शासन की ओर से निर्धारित सहायता राशि एवं उपहार सामग्री प्रदान की गई। सांसद श्री जनार्दन मिश्र ने कहा कि यह योजना गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जिससे बेटियों के विवाह का बोझ कम हुआ है।
विधायक इंजी. नरेन्द्र कुमार प्रजापति ने भी नवदंपत्तियों को सुखद वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष ममता कुंजबिहारी तिवारी, नगर परिषद अध्यक्ष नागिता गुप्ता, अपर कलेक्टर पी.के. पाण्डेय, एसडीएम एपी द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, जनप्रतिनिधि और परिजन मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- क्या मछुआ समितियों को केज सिस्टम और आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण वास्तव में समय पर उपलब्ध हो पा रहा है, या यह केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित है?
- सामूहिक विवाह में दी जाने वाली सरकारी सहायता राशि क्या बढ़ती महंगाई और वास्तविक विवाह खर्चों की तुलना में पर्याप्त है, या यह केवल प्रतीकात्मक मदद बनकर रह जाती है?
- क्या मत्स्य पालन और ग्रामीण आजीविका योजनाओं के क्रियान्वयन में बैंकों और सहकारी समितियों की भागीदारी वास्तव में प्रभावी है, या ग्रामीण अब भी कागजी प्रक्रियाओं में उलझे रहते हैं?