उज्जैन; कुपोषण के खिलाफ उज्जैन का ‘संवर्धन मिशन’! अब घर-घर पहुंचेंगे मॉनिटर Aajtak24 News

उज्जैन; कुपोषण के खिलाफ उज्जैन का ‘संवर्धन मिशन’! अब घर-घर पहुंचेंगे मॉनिटर Aajtak24 News

उज्जैन - जिले को कुपोषण मुक्त बनाने और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “प्रोजेक्ट संवर्धन” की समीक्षा बैठक शुक्रवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रेयांस कूमट ने की। बैठक में स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषित आहार लेने के लिए लगातार जागरूक किया जाए तथा फील्ड स्तर पर नियमित और संयुक्त मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

सीईओ श्री कूमट ने कहा कि प्रोजेक्ट संवर्धन के अंतर्गत नियुक्त मॉनिटर विशेष रुचि लेकर गांव-गांव भ्रमण करें और बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा धात्री माताओं के पोषण स्तर की जांच करें। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि किसी बच्चे में कुपोषण पाया जाता है तो उसे तुरंत पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाए और उपचार के बाद उसका नियमित फॉलोअप भी लिया जाए। बैठक में यह भी कहा गया कि धात्री महिलाओं को स्तनपान के महत्व के बारे में जागरूक किया जाए और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए लगातार संपर्क बनाए रखा जाए।

तराना के पोषण पुनर्वास केंद्र में एलईडी स्क्रीन के माध्यम से माताओं को वीडियो दिखाकर पोषण संबंधी जानकारी देने की पहल की बैठक में सराहना की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिले के सभी पोषण पुनर्वास केंद्रों में इसी तरह वीडियो आधारित जागरूकता अभियान चलाया जाए। बैठक में जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार पटेल, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग बृजेश त्रिपाठी, जिला स्वास्थ्य एवं महामारी नियंत्रण अधिकारी डॉ. सुनीता परमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्रोजेक्ट संवर्धन के तहत दी जा रही सेवाओं की ऑनलाइन रिपोर्टिंग भी नियमित रूप से पोर्टल पर दर्ज की जाए, ताकि योजनाओं की वास्तविक प्रगति की निगरानी हो सके।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. अगर जिले में पहले से पोषण योजनाएं चल रही हैं, तो फिर अब भी कुपोषण और मातृ-शिशु मृत्यु दर चिंता का विषय क्यों बनी हुई है?
  2. फील्ड मॉनिटरिंग और घर-घर जांच की बात हर बैठक में होती है, लेकिन क्या प्रशासन के पास यह आंकड़ा है कि कितने बच्चों का वास्तविक फॉलोअप लगातार हो रहा है?
  3. क्या पोषण पुनर्वास केंद्रों में पर्याप्त स्टाफ, संसाधन और बेड उपलब्ध हैं, ताकि गंभीर कुपोषित बच्चों को समय पर भर्ती और उपचार मिल सके?

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