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| टीकमगढ़; मातृ मृत्यु पर टीकमगढ़ प्रशासन का ‘रेड अलर्ट’… हाईरिस्क गर्भवतियों की अब होगी समय से पहचान और निगरानी Aajtak24 News |
टीकमगढ़ - जिले में लगातार बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने और मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय के निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ओ.पी. अनुरागी के मार्गदर्शन में आयोजित इस बैठक में गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई। बैठक में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शांतनु दीक्षित ने कहा कि मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए किशोरावस्था से ही स्वास्थ्य सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि एनीमिया मुक्त कार्यक्रम के तहत सभी किशोरी बालिकाओं को शत-प्रतिशत आयरन दवा उपलब्ध कराई जाए, ताकि भविष्य में गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं को कम किया जा सके।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ओ.पी. अनुरागी ने गर्भवती महिलाओं का प्रथम तिमाही में अनिवार्य पंजीयन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय पर पंजीयन होने से महिलाओं को शासन की योजनाओं का लाभ मिलने के साथ-साथ आवश्यक स्वास्थ्य जांच और चिकित्सीय निगरानी भी समय पर संभव हो सकेगी। बैठक में हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और प्रबंधन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को बताया गया कि 24 बिंदुओं के आधार पर जोखिम वाली गर्भवतियों की पहचान कर उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
इसके अलावा निर्देश दिए गए कि संभावित प्रसव तिथि से कम से कम 7 दिन पहले हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क 108 एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती कराया जाए, ताकि आपात स्थिति से बचा जा सके। बैठक में सीएचओ, एएनएम, एपीडब्ल्यू, आशा कार्यकर्ता और सुपरवाइजरों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया कि मातृ स्वास्थ्य सुधार के लिए सभी को समन्वय के साथ कार्य करना होगा।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व आश्वासन कार्यक्रम के तहत प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को महिला चिकित्सकों द्वारा गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक के दौरान पूर्व में हुई मातृ मृत्यु के मामलों की समीक्षा करते हुए उनके कारणों पर चर्चा की गई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुधारात्मक कदमों पर मंथन किया गया। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक अंकित रावत, डीसीएम प्रबल त्रिपाठी, सभी खंड चिकित्सा अधिकारी और अन्य स्वास्थ्य अधिकारी उपस्थित रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- क्या जिले में मातृ मृत्यु के पुराने मामलों में स्वास्थ्य व्यवस्था की किसी लापरवाही या देरी की जिम्मेदारी तय की गई है, या समीक्षा केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह गई है?
- ग्रामीण क्षेत्रों में हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान और समय पर अस्पताल पहुंचाने में सबसे बड़ी बाधा क्या है—स्वास्थ्य ढांचा, जागरूकता या संसाधनों की कमी?
- एनीमिया मुक्त अभियान वर्षों से चल रहा है, फिर भी बड़ी संख्या में किशोरियां और गर्भवती महिलाएं एनीमिया से क्यों जूझ रही हैं, और इसकी जवाबदेही किसकी है?
