बिलासपुर; अब तार जोड़ेंगी ‘बिहान दीदी’: गांव की महिलाएं बनीं बिजली की नई ताकत Aajtak24 News

बिलासपुर; अब तार जोड़ेंगी ‘बिहान दीदी’: गांव की महिलाएं बनीं बिजली की नई ताकत Aajtak24 News

बिलासपुर - ग्रामीण महिलाओं की पहचान अब केवल रसोई, सिलाई और पारंपरिक कामों तक सीमित नहीं रही। बिलासपुर में महिलाओं ने उस क्षेत्र में कदम रखा है जिसे वर्षों से पुरुषों का काम माना जाता रहा है। अब गांव की महिलाएं इलेक्ट्रिशियन बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। कोनी स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) में पहली बार महिलाओं के लिए इलेक्ट्रिशियन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। इस पहल में जिले के अलग-अलग गांवों से आई 20 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का मकसद महिलाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर देना है।

रतनपुर की बिहान समूह से जुड़ी आबिदा बताती हैं कि पहले उन्हें लगता था कि बिजली का काम केवल पुरुष ही कर सकते हैं, लेकिन प्रशिक्षण के बाद उनकी सोच बदल गई। अब वे घर की वायरिंग, स्विच बोर्ड सुधार और घरेलू उपकरणों की छोटी खराबियां खुद ठीक कर लेती हैं। उनका कहना है कि इससे न केवल आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि भविष्य में आय बढ़ाने का रास्ता भी खुला है। वहीं मस्तूरी के डोमगांव की तिगमती डहरिया, जो पहले से निजी कंपनी में इलेक्ट्रिशियन का काम कर रही थीं, कहती हैं कि प्रशिक्षण ने उन्हें आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों की बेहतर समझ दी है। उनका मानना है कि सही प्रशिक्षण और सावधानी के साथ महिलाएं भी इस क्षेत्र में सफलतापूर्वक काम कर सकती हैं।

प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं ने बताया कि संस्थान में रहने-खाने की बेहतर व्यवस्था के साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। तकनीकी जानकारी के अलावा उन्हें आत्मविश्वास, अनुशासन और स्वरोजगार के बारे में भी मार्गदर्शन मिला। गौरतलब है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा एसबीआई के सहयोग से हर साल महिलाओं और युवाओं के लिए कई नि:शुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं। हालांकि इस वर्ष महिलाओं के लिए इलेक्ट्रिशियन प्रशिक्षण की शुरुआत ने ग्रामीण क्षेत्रों में नई सोच और बदलाव की मजबूत नींव रखी है। यह पहल महिलाओं को केवल हुनर ही नहीं, बल्कि समाज में नई पहचान और सम्मान भी दे रही है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब महिलाओं को इलेक्ट्रिशियन जैसे तकनीकी काम में सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया जा सकता है, तो अब तक ऐसे कोर्स सिर्फ पुरुषों तक सीमित क्यों रहे? क्या यह व्यवस्था की सोच में कमी नहीं थी?
  2. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन महिलाओं को रोजगार या सरकारी प्रोजेक्ट से जोड़ने की क्या ठोस योजना है, या यह कार्यक्रम सिर्फ प्रमाणपत्र बांटने तक सीमित रहेगा?
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा और फील्ड वर्क को लेकर क्या अलग सुरक्षा नीति बनाई गई है, या उन्हें प्रशिक्षण के बाद अपने हाल पर छोड़ दिया जाएगा?

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