रीवा; कागजों में बह रहा जल संरक्षण?” रीवा में कलेक्टर की सख्ती—अब हर तालाब Aajtak24 News

रीवा; कागजों में बह रहा जल संरक्षण?” रीवा में कलेक्टर की सख्ती—अब हर तालाब Aajtak24 News

रीवा - जिले में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने साफ शब्दों में कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जल संरक्षण से जुड़े प्रत्येक कार्य—चाहे वह वाटर हार्वेस्टिंग हो, रिचार्ज पिट निर्माण, तालाबों का जीर्णोद्धार या वृक्षारोपण—उसकी फोटो सहित पूरी जानकारी निर्धारित पोर्टल पर तत्काल अपलोड की जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्तर पर इस अभियान की लगातार मॉनिटरिंग हो रही है, इसलिए जमीनी कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता अनिवार्य है।

कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ को विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर अभियान की प्रगति नियमित रूप से पोर्टल पर अपडेट कराने के निर्देश दिए। वहीं जनपद सीईओ को ग्राम पंचायत स्तर पर चल रहे जल संरक्षण कार्यों की वास्तविक स्थिति दर्ज कराने को कहा गया। बैठक में शिक्षा विभाग को भी जिम्मेदारी सौंपी गई। अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा को कॉलेजों में आयोजित जल संगोष्ठी, भाषण प्रतियोगिता और जनजागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी अपलोड करने के निर्देश दिए गए। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी को स्कूलों में पानी की टंकियों की सफाई और जागरूकता गतिविधियों की रिपोर्ट दो दिनों के भीतर पोर्टल पर दर्ज कराने को कहा गया।

कलेक्टर ने सभी एसडीएम को अपने-अपने अनुभाग में जल संरचनाओं को राजस्व रिकॉर्ड यानी खसरे में दर्ज कराने और तालाबों तथा जलाशयों से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जल स्रोतों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और अभियान की नियमित मॉनिटरिंग हो।

नगर निगम और नगरीय निकायों को निर्देशित किया गया कि वे केवल स्वच्छता तक सीमित न रहें, बल्कि परंपरागत जल स्रोतों की सफाई, तालाबों के पुनर्जीवन और नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दें। कलेक्टर ने कहा कि इस अभियान को जन आंदोलन बनाने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं और आम जनता की सहभागिता भी जरूरी है। बैठक में जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर ने अभियान की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की। समीक्षा के दौरान यह भी संकेत दिए गए कि जिन विभागों द्वारा पोर्टल अपडेट करने या जमीनी कार्यों में लापरवाही बरती जाएगी, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जल गंगा संवर्धन अभियान में अब तक कितने कार्य सिर्फ कागजों और पोर्टल तक सीमित हैं, और कितनों का वास्तविक भौतिक सत्यापन हुआ है?
  2. तालाबों और जलाशयों से अवैध कब्जे हटाने के निर्देश वर्षों से दिए जा रहे हैं, फिर अब तक बड़े स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी?
  3. क्या पोर्टल पर फोटो और डेटा अपलोड करने की प्रक्रिया वास्तविक काम की निगरानी है या सिर्फ आंकड़ों का प्रदर्शन बनकर रह गई है?

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