| श्योपुर; आंगनबाड़ी में अव्यवस्था, स्कूल में गायब शिक्षक! कलेक्टर के दौरे ने खोली जमीनी हकीकत Aajtak24 News |
श्योपुर - जिले के आदिवासी विकासखंड कराहल के ग्राम नसीहर में कलेक्टर शीला दाहिमा के आकस्मिक निरीक्षण ने आंगनबाड़ी और प्राथमिक स्कूल की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। निरीक्षण के दौरान पोषण व्यवस्था में गंभीर लापरवाही सामने आने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती किरण जाटव से केंद्र संचालन और गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को टीएचआर वितरण की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि नाश्ते और भोजन का सैंपल सुरक्षित नहीं रखा गया था, रिकॉर्ड रजिस्टर व्यवस्थित नहीं थे और टीएचआर वितरण में भी अनियमितता थी। इसके अलावा केंद्र में दर्ज 30 बच्चों की जानकारी पोषण ट्रैकर एप पर अपडेट नहीं पाई गई।
इन खामियों को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती किरण जाटव, सहायिका श्रीमती राधा गुर्जर और सेक्टर सुपरवाइजर श्री सुरेन्द्र सिंह कतरोलिया को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने परिसर में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय नसीहर के संबंध में भी ग्रामीणों और बच्चों से चर्चा की। ग्रामीणों ने शिकायत की कि स्कूल खुलने के दौरान भी शिक्षक नियमित रूप से नहीं आते और पूरे समय विद्यालय में नहीं रुकते, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
बच्चों की शिकायत सुनने के बाद कलेक्टर ने सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण श्री राकेश गुप्ता को तत्काल जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह निरीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण, शिक्षा और महिला-बाल विकास योजनाओं को मजबूत बनाने का दावा कर रही है। लेकिन नसीहर गांव में सामने आई स्थिति ने जमीनी अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- अगर आंगनबाड़ी केंद्र में टीएचआर वितरण, रिकॉर्ड और पोषण ट्रैकर जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं ही नहीं संभल पा रहीं, तो विभाग बच्चों और महिलाओं के पोषण सुधार के दावों को कैसे सही ठहराएगा?
- ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक नियमित रूप से स्कूल नहीं आते—क्या विभाग के पास स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति मॉनिटर करने की कोई प्रभावी व्यवस्था है या सब कुछ सिर्फ कागजों में चल रहा है?
- सुपरवाइजर स्तर तक लापरवाही मिलने के बाद क्या सिर्फ नोटिस देकर मामला खत्म होगा, या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी?