मुरैना; वर्दी पहनने का सपना अब होगा आसान! मुरैना में युवाओं को फ्री ट्रेनिंग और स्टाइपेंड Aajtak24 News

मुरैना; वर्दी पहनने का सपना अब होगा आसान! मुरैना में युवाओं को फ्री ट्रेनिंग और स्टाइपेंड Aajtak24 News

मुरैना - जिले में युवाओं को सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए तैयार करने के उद्देश्य से प्रशासन ने ‘शौर्य संकल्प योजना’ को तेज़ी से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कमलेश कुमार भार्गव की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिक से अधिक पात्र युवाओं को लाभ दिलाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सीईओ श्री भार्गव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना की जानकारी गांव-गांव और युवाओं तक व्यापक स्तर पर पहुंचाई जाए ताकि अधिक से अधिक आवेदन प्राप्त हो सकें।

उन्होंने बताया कि ‘शौर्य संकल्प योजना’ के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के बालक एवं बालिकाओं को आर्मी, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की भर्ती परीक्षाओं के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में केवल लिखित परीक्षा की तैयारी ही नहीं बल्कि शारीरिक दक्षता प्रशिक्षण भी शामिल रहेगा। योजना के तहत चयनित अभ्यर्थियों को आवासीय सुविधा, भोजन और नियमित कक्षाओं की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही प्रशिक्षण के दौरान चयनित बालकों को प्रतिमाह 1000 रुपये और बालिकाओं को 1100 रुपये स्टाइपेंड दिया जाएगा।

प्रशासन का मानना है कि यह योजना ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकती है, जो संसाधनों के अभाव में सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी नहीं कर पाते। बैठक में अधिकारियों से कहा गया कि योजना का लाभ सही पात्र युवाओं तक पहुंचे और चयन प्रक्रिया पारदर्शी रहे, यह सुनिश्चित किया जाए। मुरैना जैसे सीमावर्ती और ग्रामीण अंचल वाले जिले में बड़ी संख्या में युवा सेना और पुलिस में भर्ती होने का सपना देखते हैं। ऐसे में प्रशासन की यह पहल युवाओं को रोजगार और बेहतर भविष्य की दिशा में नई उम्मीद देने वाली मानी जा रही है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या ‘शौर्य संकल्प योजना’ में चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी, ताकि सिफारिश और राजनीतिक दबाव जैसी शिकायतें सामने न आएं?
  2. योजना में सिर्फ OBC वर्ग को शामिल किया गया है, तो क्या अन्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं के लिए भी भविष्य में ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी?
  3. फ्री ट्रेनिंग और स्टाइपेंड की घोषणा तो हो गई, लेकिन क्या प्रशासन के पास पर्याप्त प्रशिक्षक, संसाधन और स्थायी ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है या योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी?

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