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| दतिया; जनसुनवाई में उमड़ी फरियादियों की भीड़! किसान सम्मान निधि से लेकर पेंशन तक गूंजे सवाल Aajtak24 News |
दतिया - जिले में आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए मंगलवार को न्यू कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जनसुनवाई में फरियादियों की भारी भीड़ उमड़ी। जनसुनवाई के दौरान अक्षय कुमार तेम्रवाल ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए 110 से अधिक आवेदकों की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। जनसुनवाई में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आए लोगों ने किसान सम्मान निधि, पेंशन, सीमांकन, नामांतरण, सड़क निर्माण, खाद्यान वितरण, छात्रवृत्ति और आर्थिक सहायता जैसी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। कई मामलों में मौके पर ही समाधान किया गया, जबकि लंबित प्रकरणों के लिए अधिकारियों को समय-सीमा निर्धारित कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
डबरा की गणेश कॉलोनी निवासी देव साहू ने शिकायत की कि उनकी पैतृक कृषि भूमि ग्राम इकारा तहसील दतिया में स्थित है, लेकिन किसान सम्मान निधि की किश्त अक्टूबर 2022 से बंद है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सीईओ ने आवेदन तहसीलदार दतिया को सौंपते हुए नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं भांडेर तहसील के ग्राम कर्रा निवासी किशोरी खंगार ने अपनी पत्नी के नाम भैंस खरीदने के लिए भारतीय स्टेट बैंक से ऋण स्वीकृत कराने की मांग रखी। इस आवेदन को एलडीएम दतिया को भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
जनसुनवाई में रास्ता अवरुद्ध होने, नाली निकासी की समस्या, वृद्धावस्था पेंशन, बीपीएल सूची में नाम जोड़ने, साफ-सफाई व्यवस्था और सड़क निर्माण से जुड़े कई आवेदन भी सामने आए। सीईओ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए तय समय-सीमा में समाधान सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन का कहना है कि जनसुनवाई का उद्देश्य लोगों को जिला स्तर पर त्वरित राहत देना और विभागीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना है। हालांकि हर सप्ताह बड़ी संख्या में एक जैसी शिकायतों का सामने आना स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। इस दौरान श्रुति अग्रवाल सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि जनसुनवाई में हर सप्ताह पेंशन, किसान सम्मान निधि और बीपीएल सूची जैसी मूलभूत समस्याएं आ रही हैं, तो संबंधित विभाग नियमित स्तर पर काम क्यों नहीं कर पा रहे?
- किसान सम्मान निधि की किश्त 2022 से बंद होने के बावजूद अब तक समाधान क्यों नहीं हुआ और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई?
- जनसुनवाई में दिए गए निर्देशों का फॉलोअप कैसे होता है, और क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि पिछले महीनों में कितने आवेदन आज भी लंबित हैं?
