![]() |
| शिवपुरी; 400 फरियादी, एक जनसुनवाई और अफसरों की फटकार! शिवपुरी में कलेक्टर का सख्त संदेश Aajtak24 News |
शिवपुरी - अर्पित वर्मा द्वारा मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में आमजन की भारी भीड़ उमड़ी, जहां जिलेभर से आए लोगों ने अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। जनसुनवाई में कुल 400 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें राजस्व, आर्थिक सहायता, पेंशन, सीमांकन और अन्य नागरिक समस्याओं से जुड़े मामले प्रमुख रहे। कलेक्टर अर्पित वर्मा ने एक-एक आवेदन को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता की समस्याओं को लंबित रखना स्वीकार नहीं किया जाएगा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
जनसुनवाई के दौरान पिछोर, खनियाधाना और नरवर क्षेत्र से जुड़े राजस्व मामलों में लगातार हो रही देरी पर कलेक्टर ने सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित एसडीएम को फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल निपटाया जाए ताकि आमजन को राहत मिल सके। सूत्रों के अनुसार कई आवेदकों ने जमीन सीमांकन, नामांतरण और राजस्व रिकॉर्ड सुधार में लंबे समय से हो रही देरी की शिकायत की। इन मामलों को लेकर कलेक्टर ने अधिकारियों से जवाब-तलब भी किया। जनसुनवाई में आए लोगों का कहना था कि तहसील स्तर पर समस्याओं का समय पर समाधान नहीं होने के कारण उन्हें जिला मुख्यालय तक आना पड़ रहा है।
जनसुनवाई के दौरान मानवीय पहल भी देखने को मिली। वार्ड क्रमांक-13 मनियर निवासी मनोज शर्मा को रेडक्रॉस मद से 5 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि का चेक मौके पर ही प्रदान किया गया। प्रशासन का कहना है कि जरूरतमंद लोगों को तत्काल राहत देने के लिए इस प्रकार की सहायता लगातार जारी रहेगी। हालांकि 400 आवेदनों का एक ही दिन में सामने आना जिला प्रशासन की निचले स्तर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। बड़ी संख्या में राजस्व प्रकरणों का लंबित होना ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्रशासनिक सुस्ती की ओर संकेत माना जा रहा है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब तहसील स्तर पर समस्याओं के समाधान की व्यवस्था है, तो फिर 400 लोगों को जिला मुख्यालय आकर जनसुनवाई में आवेदन देने की जरूरत क्यों पड़ी?
- पिछोर, खनियाधाना और नरवर क्षेत्र में राजस्व मामलों में लगातार देरी हो रही है, तो क्या संबंधित एसडीएम और राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी?
- क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि पिछली जनसुनवाईयों में मिले कितने आवेदन आज भी लंबित हैं और किन मामलों में कार्रवाई नहीं हुई?
