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| ग्वालियर; किसानों को घंटों इंतजार पड़ा भारी! ग्वालियर में कलेक्टर का छापा, मैनेजर सस्पेंड Aajtak24 News |
ग्वालियर - रुचिका चौहान ने मंगलवार को लक्ष्मीगंज मंडी स्थित सीडब्ल्यूसी गोदाम परिसर में संचालित गेहूँ उपार्जन केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया। निरीक्षण के दौरान हरिलीला सहकारी समिति के खरीदी केन्द्र पर तौल-कांटों की संख्या कम मिलने और किसानों को लंबा इंतजार कराने पर कलेक्टर ने तत्काल सख्त कार्रवाई करते हुए समिति प्रबंधक रामकृष्ण साहू को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही खरीदी प्रभारी का वेतन काटने तथा संबंधित क्षेत्र के नोडल अधिकारी की वेतनवृद्धि रोकने के निर्देश भी जारी किए गए। कलेक्टर की इस कार्रवाई के बाद उपार्जन केन्द्रों पर व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कलेक्टर श्रीमती चौहान तिघरा सहकारी समिति और हरिलीला सहकारी समिति द्वारा संचालित खरीदी केन्द्रों का निरीक्षण करने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने किसानों से सीधे बातचीत कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। किसानों ने तौल में देरी और लंबी प्रतीक्षा की समस्या बताई, जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। निरीक्षण में पाया गया कि खरीदी केन्द्र पर पर्याप्त तौल-कांटे उपलब्ध नहीं थे, जिसके कारण किसानों की उपज की तुलाई धीमी गति से हो रही थी। इस पर कलेक्टर ने तत्काल अतिरिक्त तौल-कांटे लगाने के निर्देश दिए और साफ कहा कि किसानों को किसी भी स्थिति में अनावश्यक इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए।
कलेक्टर ने खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिए पेयजल, गुड़-चना और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि वाटर कूलर के साथ मटकों की भी व्यवस्था की जाए ताकि गर्मी में किसानों को परेशानी न हो। साथ ही खरीदी केन्द्रों को निर्धारित स्लॉट के अनुसार संचालित करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सर्वेयरों को गेहूँ की गुणवत्ता जांच को लेकर भी सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर खरीदा गया गेहूँ सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत लोगों तक पहुंचता है, इसलिए एफएक्यू मानकों के अनुसार गुणवत्ता जांच बेहद जरूरी है। किसानों से भी साफ और छना हुआ गेहूँ लाने की अपील की गई ताकि तुलाई कार्य तेजी से हो सके।
कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले के प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर कम से कम छह तौल-कांटे सक्रिय रहना अनिवार्य होगा। यदि किसी भी केन्द्र पर किसानों की सुविधाओं में कमी या अव्यवस्था पाई गई तो संबंधित अधिकारियों और समिति प्रबंधकों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने खरीदे गए गेहूँ का समय पर सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए, ताकि बेमौसम बारिश से अनाज खराब न हो। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में अन्य खरीदी केन्द्रों पर भी इसी तरह औचक निरीक्षण किए जाएंगे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि हर खरीदी केन्द्र पर कम से कम 6 तौल-कांटे अनिवार्य हैं, तो हरिलीला समिति में यह व्यवस्था पहले से क्यों नहीं थी और जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की?
- क्या प्रशासन यह बताएगा कि जिले के कितने उपार्जन केन्द्रों पर किसानों को तय समय से ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है और वहां क्या व्यवस्थाएं हैं?
- हर साल उपार्जन सीजन में अव्यवस्थाओं की शिकायतें सामने आती हैं, फिर भी स्थायी सुधार क्यों नहीं हो पा रहा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
